पटना: बिहार ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए 3 जुलाई की रात 10:58 बजे राज्य की अब तक की सबसे अधिक 9,155 मेगावाट पीक बिजली मांग का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया। रिकॉर्ड मांग के बावजूद पूरे राज्य में उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति जारी रही।
ऊर्जा विभाग के अनुसार यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा ट्रांसमिशन एवं वितरण अवसंरचना को मजबूत करने, ग्रिड क्षमता बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग का परिणाम है। घरेलू, औद्योगिक, कृषि और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती बिजली खपत के बावजूद बिजली व्यवस्था पूरी तरह स्थिर रही।
एक दशक में पांच गुना बढ़ी बिजली मांग
राज्य में बिजली की मांग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। लगभग एक दशक पहले जहां अधिकतम बिजली मांग करीब 1,800 मेगावाट थी, वहीं अब यह बढ़कर 9,155 मेगावाट तक पहुंच गई है। पहले साल में एक बार दर्ज होने वाली उच्चतम मांग अब नियमित रूप से कई बार पार हो रही है।
मजबूत हुई बिजली व्यवस्था
ऊर्जा विभाग ने ट्रांसमिशन लाइन, ग्रिड उपकेंद्र, पावर ट्रांसफॉर्मर और वितरण नेटवर्क का लगातार विस्तार किया है। आधुनिक रियल-टाइम मॉनिटरिंग, प्रभावी लोड मैनेजमेंट और तकनीकी निगरानी के कारण रिकॉर्ड मांग के समय भी ग्रिड पूरी तरह स्थिर रहा।
विभाग की ओर से पूरे बिजली तंत्र की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। साथ ही उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 1912 हेल्पलाइन और राज्यभर में संचालित फ्यूज कॉल सेंटर लगातार सक्रिय हैं, जहां शिकायतों का त्वरित समाधान किया जा रहा है।
ऊर्जा मंत्री ने दी बधाई
ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि बिजली की बढ़ती मांग बिहार के तेज विकास का संकेत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर उपभोक्ता तक निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों के सभी कर्मचारियों को बधाई दी।
आधुनिक तकनीक से मिली सफलता
ऊर्जा विभाग के सचिव सह सीएमडी अजय यादव ने कहा कि बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क का लगातार आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आधुनिक ग्रिड प्रबंधन, क्षमता विस्तार और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के कारण बिहार लगातार रिकॉर्ड बिजली मांग का सफलतापूर्वक प्रबंधन कर रहा है। साथ ही उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को भी और अधिक सशक्त बनाया गया है।






