बांकीपुर उपचुनाव: लोगों की राय में भाजपा-जन सुराज के बीच हो सकता है सीधा मुकाबला, चुनावी सरगर्मियां तेज

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पटना: भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद रिक्त हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। राजधानी पटना की इस हाईप्रोफाइल सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना होगी। चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है और स्थानीय स्तर पर भी चुनावी चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं।

भाजपा का गढ़ रही है बांकीपुर सीट

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने गए। उनके राज्यसभा जाने के बाद भाजपा ने इस उपचुनाव में युवा नेता अभिषेक कुमार सिन्हा ‘बंटी’ को उम्मीदवार बनाया है।

वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने एक बार फिर रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर, जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के भी चुनाव मैदान में उतरने की संभावना है। उनके 13 जुलाई को नामांकन दाखिल करने की चर्चा है।

पिछली बार भाजपा को मिली थी बड़ी जीत

वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने 98,299 वोट (62.66 प्रतिशत) हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी। राजद की रेखा गुप्ता को 46,363 वोट (29.55 प्रतिशत) मिले थे, जबकि जन सुराज की वंदना कुमारी को 7,717 वोट (4.92 प्रतिशत) प्राप्त हुए थे। 1,464 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था।

इस बार नितिन नवीन के चुनाव मैदान में नहीं होने से मुकाबला पहले की तुलना में अधिक रोचक माना जा रहा है।

नामांकन के साथ तेज हुआ चुनाव प्रचार

भाजपा प्रत्याशी अभिषेक कुमार सिन्हा और राजद प्रत्याशी रेखा गुप्ता ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। दोनों दलों ने चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है। वहीं, जन सुराज भी अपने अभियान को धार देने में जुटी हुई है और प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की संभावना से चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होता दिख रहा है।

क्या कहते हैं स्थानीय मतदाता?

चिरैयाटांड़ मंडल के चांदमारी रोड निवासी मुकेश कुमार का कहना है कि उनका परिवार लंबे समय से भाजपा समर्थक रहा है, लेकिन इस बार क्षेत्र में बदलाव की चर्चा भी सुनाई दे रही है। उनके अनुसार मुकाबला भाजपा और जन सुराज के बीच रोचक हो सकता है।

बाकरगंज के व्यवसायी अभिषेक कुमार का कहना है कि नितिन नवीन ने क्षेत्र में काफी विकास कार्य किए हैं, लेकिन उनके चुनाव मैदान में नहीं रहने से चुनाव पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प हो गया है।

मंदिरी के निवासी सुमीत राय का मानना है कि प्रचार अभियान आगे बढ़ने के साथ मतदाताओं का रुझान और स्पष्ट होगा। वहीं, सुजीत सिन्हा का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार के कार्यों का भाजपा को लाभ मिलेगा, हालांकि प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से जीत का अंतर प्रभावित हो सकता है।

जातीय समीकरण भी होंगे निर्णायक

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण भी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में कायस्थ मतदाता लगभग 14 प्रतिशत, यादव 12 प्रतिशत, मुस्लिम और चंद्रवंशी 9-9 प्रतिशत, वैश्य 9 प्रतिशत, दलित और भूमिहार 8-8 प्रतिशत, ब्राह्मण 7 प्रतिशत, राजपूत और कुर्मी 5-5 प्रतिशत, कुशवाहा लगभग 3 प्रतिशत तथा अन्य वर्गों की हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत बताई जाती है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखकर चुनावी रणनीति तैयार कर रहे हैं।

विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी राजनीतिक परीक्षा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए अपनी संगठनात्मक ताकत, जनसमर्थन और चुनावी रणनीति की परीक्षा भी है। ऐसे में भाजपा, राजद और जन सुराज इस सीट पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।

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