नवादा, 17 अक्टूबर : जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जन सुराज के प्रत्याशियों की जीत से राज्य में वित्तरहित शिक्षा नीति को समाप्त करने तथा निजी कॉलेजों को अंगीभूत कराने की दिशा में रास्ता साफ होगा। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा और शिक्षकों, स्नातकों तथा शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी जाएगी।
प्रशांत किशोर शनिवार को नवादा में आयोजित शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं के जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. अनुज सिंह, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. दिव्या ज्योति समेत जन सुराज के सभी प्रत्याशियों को विजयी बनाने की अपील की।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत : प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल लंबे समय से अनदेखे किए जाते रहे हैं। वित्तरहित शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों की समस्याओं का समाधान और निजी कॉलेजों को अंगीभूत करने की मांग पर गंभीरता से पहल करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जन सुराज के प्रत्याशियों की जीत से इन मुद्दों को मजबूती से उठाने और अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का माध्यम नहीं है, बल्कि शिक्षकों, स्नातकों और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर जवाब मांगने का अवसर भी है। मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के उद्देश्य से करना चाहिए।
रोजगार और बेरोजगारी भत्ते का मुद्दा उठाएंगे डॉ. अनुज सिंह
जन सुराज के स्नातक प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह ने कहा कि जीत मिलने पर स्नातकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, बेरोजगारी भत्ता दिलाने और वित्तरहित शिक्षण संस्थानों को अंगीभूत कराने के लिए व्यापक जनसंघर्ष किया जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में नए स्कूल और कॉलेज खोले जा सकते हैं तथा वहां शिक्षकों की बहाली की जा सकती है, तो बेहतर भवन, योग्य शिक्षक और पर्याप्त शैक्षणिक संसाधन वाले निजी कॉलेजों को अंगीभूत क्यों नहीं किया जा सकता?
पुराने प्रतिनिधियों की भूमिका पर उठाए सवाल
डॉ. अनुज सिंह ने आरोप लगाया कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पिछले 18 वर्षों तक विधान पार्षद रहे प्रतिनिधि ने शिक्षकों और स्नातकों से जुड़े इन मुद्दों को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक समस्याओं की अनदेखी होना शिक्षकों और स्नातकों के हितों के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुके हैं। उन्हें बेहतर सुविधाएं, रोजगार के अवसर और सम्मानजनक भविष्य चाहिए। जन सुराज इन मुद्दों को लेकर संघर्ष करेगा और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए आवाज उठाएगा।






