पलामू। श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के जिला नियोजनालय-सह-मॉडल कैरियर सेंटर, पलामू की ओर से गुरुवार को टाउन हॉल में दत्तोपंत ठेंगड़ी रोजगार मेला-2026 का आयोजन किया गया। रोजगार मेले में 25 प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया और विभिन्न पदों के लिए युवाओं का चयन किया।
1200 से अधिक अभ्यर्थियों ने लिया भाग
रोजगार मेले का उद्घाटन उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, सहायक समाहर्ता ऋत्विक मेहता और जिला नियोजन पदाधिकारी नीरज कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मेले में पलामू सहित आसपास के क्षेत्रों से 1200 से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया। विभिन्न कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाकर अभ्यर्थियों का साक्षात्कार और चयन प्रक्रिया पूरी की।
411 अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट, 166 को मौके पर मिला ऑफर लेटर
चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के बाद 411 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें से 166 युवाओं को मौके पर ही ऑफर लेटर प्रदान किया गया।
चयनित अभ्यर्थियों को गार्ड, ट्रेनर, स्टोर कीपर, टेक्नीशियन और मशीन ऑपरेटर सहित विभिन्न पदों पर रोजगार के अवसर मिले। कई पदों पर 20 हजार रुपये प्रतिमाह तक के वेतन का प्रस्ताव दिया गया।
उपायुक्त ने प्रतीकात्मक रूप से कुछ चयनित युवाओं को ऑफर लेटर भी सौंपे।
‘रोजगार युवाओं की प्रतिभा को सही दिशा देता है’ : उपायुक्त
इस अवसर पर उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के बाद रोजगार जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। यदि युवाओं को समय पर रोजगार नहीं मिलता, तो उनकी प्रतिभा और कौशल प्रभावित होते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है और उनकी ऊर्जा को सही दिशा देकर ही विकसित राष्ट्र का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
कौशल विकास कार्यक्रमों से जुड़ने का आह्वान
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक युवाओं को उनके कौशल के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए समय-समय पर रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने युवाओं से कौशल विकास कार्यक्रमों का लाभ उठाने और बेहतर भविष्य के लिए स्वयं को लगातार तैयार रखने का आह्वान किया।
कंपनियों और प्रशासनिक अधिकारियों की रही सहभागिता
रोजगार मेले में जिला प्रशासन के अधिकारी, विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें निजी क्षेत्र से जोड़ना था।






