प्रयागराज, 05 मई । रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि आज भारत की सैन्य शक्ति में वृद्धि का आधार स्वदेशी हथियार और रक्षा प्रणालियां हैं। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इसकी सफलता का बड़ा उदाहरण है, जहां सशस्त्र बलों के साहस के साथ-साथ देश में निर्मित अत्याधुनिक तकनीकों ने अहम भूमिका निभाई।
‘नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026’ में संबोधन
प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 के दूसरे दिन अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत विकसित उपकरणों का प्रभावी उपयोग देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
MSME और स्टार्टअप्स को बताया ‘विश्वकर्मा’
संजय सेठ ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) और स्टार्टअप्स को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि यही इकाइयां वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इन्हें आधुनिक भारत के ‘विश्वकर्मा’ की संज्ञा दी।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि
उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि ‘नए भारत’ की पहचान है, जो अपनी सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर बनने पर जोर देता है। यह भारत न तो किसी पर आक्रामक नजर रखता है और न ही अपनी संप्रभुता पर खतरे को नजरअंदाज करता है।
तकनीकी नवाचार पर दिया जोर
तेजी से बदलती तकनीक का उल्लेख करते हुए उन्होंने उद्योग जगत से निरंतर नवाचार करने की अपील की। साथ ही उत्तर प्रदेश के रक्षा औद्योगिक गलियारे के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित करते हुए इसे और मजबूत करने का आह्वान किया।
सेना अधिकारियों ने भी रखे विचार
इस अवसर पर सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी अनिंद्या सेन गुप्ता ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से रणनीतिक स्वायत्तता और परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी।
रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन
तीन दिवसीय इस संगोष्ठी का आयोजन भारतीय सेना की उत्तरी और मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माताओं की सोसायटी द्वारा ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ थीम पर किया गया है। कार्यक्रम का उद्घाटन 4 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया।
संगोष्ठी में 284 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें ड्रोन, मानव रहित हवाई वाहन (UAV), एंटी-ड्रोन सिस्टम, आधुनिक वाहन और निगरानी उपकरणों सहित कई अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।






