निपाह वायरस को लेकर झारखंड में अलर्ट: जानें 40 से 75% मृत्यु दर वाला ‘वायरस’ कितना खतरनाक?

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रांची। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से दो लोगों की मौत के बाद झारखंड सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मंगलवार को राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

निपाह वायरस के प्रमुख लक्षणों में शुरुआती बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश, तेज सिरदर्द, मस्तिष्क पर तीव्र प्रभाव (ब्रेन अटैक), मानसिक सूजन (एन्सेफेलाइटिस) तथा कोमा जैसी गंभीर स्थितियां शामिल हैं।

स्वास्थ्य मंत्री की ओर जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि यह एक अत्यंत खतरनाक जानवर से इंसान में फैलने वाली (ज़ूनोटिक) बीमारी है। निपाह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्रूट बैट) से फैलता है। इसके अलावा संक्रमित जानवरों, विशेषकर सूअरों के सीधे संपर्क, उनके संक्रमित मांस के सेवन, या संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले द्रवों (जैसे लार, रक्त आदि) के सीधे संपर्क में आने से भी यह संक्रमण फैल सकता है।

इस बीमारी की मृत्यु दर (फैटेलिटी रेट) बहुत अधिक है, जो प्रकोप की स्थिति के अनुसार 40 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक हो सकती है। यही कारण है कि निपाह वायरस को अत्यंत गंभीर और घातक रोग माना जाता है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट निर्देश दिया हैं कि सभी जिलों में सख्त निगरानी, त्वरित रिपोर्टिंग व्यवस्था, और जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं, ताकि लोगों को इस बीमारी के लक्षण, बचाव और सावधानियों की पूरी जानकारी मिल सके और झारखंड में इसका कोई भी प्रकोप न होने पाए।

झारखंड सरकार इस खतरनाक बीमारी की रोकथाम के लिए पूरी तरह मुस्तैद है और स्वास्थ्य विभाग को हर स्तर पर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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