तृणमूल में बढ़ी अंदरूनी कलह, सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा

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कोलकाता, 27 मई । काकोली घोष दस्तीदार ने तृणमूल कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। पश्चिम बंगाल के बारासात से लोकसभा सांसद काकोली ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्सी को पत्र लिखकर तृणमूल महिला कांग्रेस की चेयरपर्सन समेत सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया।

तीन दिन पहले छोड़ा था जिला अध्यक्ष पद

इससे पहले काकोली घोष दस्तीदार ने जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दिया था। अपने पत्र में उन्होंने राज्य में सामने आए भ्रष्टाचार मामलों और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई।

उन्होंने राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार और अन्य विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने आम लोगों के बीच असंतोष और अविश्वास का माहौल पैदा किया है।

आरजी कर मामले का भी किया जिक्र

काकोली घोष दस्तीदार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले का भी उल्लेख किया।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज की पूर्व छात्रा रहीं काकोली ने कहा कि इस घटना और इसे दबाने के आरोपों ने समाज को झकझोर दिया और इसका व्यक्तिगत रूप से उन पर भी गहरा असर पड़ा।

बिना नाम लिए कल्याण बनर्जी पर साधा निशाना

अपने पत्र में उन्होंने बिना नाम लिए कल्याण बनर्जी पर भी निशाना साधा।

उन्होंने लिखा कि जिस पद पर रहते हुए किसी महिला सांसद के प्रति “अशिक्षित और अभद्र” व्यवहार को रोका न जा सके और वरिष्ठ नेतृत्व से सहयोग न मिले, उस पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं है।

आई-पैक की भूमिका पर भी उठाए सवाल

काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी की चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि यदि संगठन पर किसी अपारदर्शी और अलोकतांत्रिक प्रभाव का दबदबा बढ़ता है, तो यह पार्टी की विचारधारा और परंपरा के लिए शुभ संकेत नहीं है।

“सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करती रहूंगी”

सांसद ने स्पष्ट किया कि उनका फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम नहीं है। उन्होंने कहा कि वह आगे भी तृणमूल कांग्रेस की सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और जनता के प्रति नैतिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने संगठनात्मक पदों से खुद को अलग किया है।

मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी थी नाराजगी

हाल ही में तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाकर यह जिम्मेदारी फिर से कल्याण बनर्जी को सौंप दी थी।

इसके बाद काकोली ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा था कि 1976 से उनकी पहचान और 1984 से राजनीतिक सफर शुरू हुआ, लेकिन चार दशक की निष्ठा का यही पुरस्कार मिला।

शुभेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल होने से बढ़ी चर्चा

राजनीतिक हलकों में चर्चा तब और तेज हो गई जब मंगलवार को काकोली घोष दस्तीदार शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में शामिल हुईं।

हालांकि उन्होंने कहा कि प्रशासनिक बैठकों को दलगत राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। वहीं शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार “विशेष सांसदों” को प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित करेगी और पुरानी राजनीतिक संस्कृति को बदलेगी।

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