भागलपुर, 30 अगस्त। जिले के सबौर प्रखंड अंतर्गत फरका पंचायत का इंग्लिश गांव इन दिनों भीषण गंगा कटाव की चपेट में है। गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव और तेज बहाव के कारण नदी तेजी से गांव की जमीन को काट रही है। कई पक्के मकान और उपजाऊ कृषि भूमि देखते ही देखते गंगा की मुख्य धारा में समा चुके हैं। दर्जनों अन्य घर कटाव के मुहाने पर हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत और गांव के अस्तित्व को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कई पक्के मकान गंगा में समाए
तेज कटाव के कारण ग्रामीणों की जीवनभर की कमाई से बने कई पक्के मकान और खेत नदी में विलीन हो गए हैं। कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि प्रभावित परिवार अपने घरों को बचाने की बजाय उनमें लगी उपयोगी सामग्री निकालने में जुटे हैं। कई लोग खिड़की, दरवाजे, चौखट, ईंट और अन्य निर्माण सामग्री निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं।
बेघर होने के डर से पलायन तेज
कटाव की जद में आए परिवारों में बेघर होने का डर बना हुआ है। गांव से बड़ी संख्या में लोगों का पलायन शुरू हो गया है। विस्थापित परिवार ऊंचे बांधों, सड़कों के किनारे और अन्य सुरक्षित स्थानों पर तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं। प्रभावित लोगों के सामने भोजन, पेयजल और रहने की समस्या भी बढ़ती जा रही है।
घोषपुर में भी तेजी से कट रही जमीन
इंग्लिश गांव के अलावा पड़ोसी घोषपुर क्षेत्र में भी गंगा का कटाव जारी है। स्थानीय घोषपुर मध्य विद्यालय के खेल मैदान का बड़ा हिस्सा पहले ही नदी में धंस चुका है। इससे स्कूल भवन पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटाव पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो गांव का संपर्क पूरी तरह कट सकता है और बड़ी आबादी विस्थापित हो सकती है।
जियो बैग और बालू की बोरियां नहीं रोक पा रहीं कटाव
ग्रामीणों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उनका कहना है कि तेज बहाव के सामने केवल जियो बैग या बालू की बोरियां डालने की व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने इंग्लिश गांव और आसपास के रिहायशी इलाकों को बचाने के लिए स्थायी रिंग बांध और कटावरोधी कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने की मांग की है।
राहत और सुरक्षित निकासी की मांग
कटाव की गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने आपदा प्रबंधन विभाग और बाढ़ नियंत्रण इकाई को तत्काल सक्रिय करने की मांग की है। जिलाधिकारी से बेघर परिवारों को पर्याप्त पॉलीथिन शीट, सूखा राशन और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की अपील की गई है। साथ ही खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए पर्याप्त नावों की व्यवस्था करने की मांग भी की गई है।






