तृणमूल में बगावत पर अभिषेक बनर्जी का बड़ा कदम, लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकात, कहा- अलग धड़े को मान्यता नहीं दी जाए

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–तृणमूल कांग्रेस नेता ने दलबदल और संवैधानिक प्रावधानों का उठाया मुद्दा, सत्ता पक्ष पर भी लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 19 जून। Abhishek Banerjee ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से संसद भवन में मुलाकात कर तृणमूल कांग्रेस से अलग होने का दावा करने वाले धड़े को मान्यता नहीं दिए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार पार्टी की सदस्यता छोड़ने वाले व्यक्ति की संसद सदस्यता भी समाप्त हो जाती है।

लोकसभा अध्यक्ष से की महत्वपूर्ण मुलाकात

अभिषेक बनर्जी की यह मुलाकात पहले 15 जून को प्रस्तावित थी, लेकिन कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समन के कारण वह निर्धारित समय पर नहीं हो सकी थी। बाद में लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें शुक्रवार शाम 5 बजे मिलने का समय दिया।

इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी उनके साथ मौजूद रहे, जिनमें Kalyan Banerjee, Saugata Roy, Mahua Moitra और Derek O’Brien शामिल थे।

अलग धड़े को मान्यता न देने की मांग

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उन्होंने पार्टी से अलग होने का दावा करने वाले समूह को मान्यता नहीं देने का अनुरोध किया है।

उन्होंने इसके समर्थन में दो प्रमुख तर्क प्रस्तुत किए।

पहला तर्क: दूसरी पार्टी में शामिल होने पर सदस्यता समाप्त

अभिषेक ने कहा कि अलग समूह बनाने वाले कुछ सदस्यों ने दूसरी राजनीतिक पार्टी का दामन थाम लिया है। ऐसे में वे अब तृणमूल कांग्रेस के सदस्य नहीं माने जा सकते।

उनके अनुसार, पार्टी छोड़ने के बाद उनकी लोकसभा सदस्यता भी तत्काल समाप्त हो जानी चाहिए।

दूसरा तर्क: दो-तिहाई राजनीतिक दल की आवश्यकता

उन्होंने कहा कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी राजनीतिक दल के विभाजन या विलय के लिए दो-तिहाई राजनीतिक दल की सहमति आवश्यक होती है, न कि केवल दो-तिहाई विधायी दल की।

अभिषेक ने दावा किया कि संबंधित धड़ा संवैधानिक मानदंडों को पूरा नहीं करता, इसलिए उसे अलग समूह के रूप में मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।

सत्ता पक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

तृणमूल कांग्रेस नेता ने इस दौरान केंद्र की सत्तारूढ़ व्यवस्था पर धनबल और दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि संविधान को कमजोर करने और राजनीतिक समीकरण बदलने के लिए विभिन्न जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि सांसदों को प्रभावित करने के लिए धन और दबाव दोनों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे दावों के समर्थन में सबूत मौजूद हैं।

महाराष्ट्र और बंगाल का भी किया जिक्र

अभिषेक ने कहा कि इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी देखने को मिली हैं।

उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक दलों को तोड़ने और जनादेश को प्रभावित करने की कोशिशें लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत हैं।

अलग हुए नेताओं पर साधा निशाना

तृणमूल नेता ने पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं पर जनता और पार्टी के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं ने संविधान और जनादेश दोनों का अनादर किया है तथा पश्चिम बंगाल की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।

प्रमुख बिंदु

  • अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की।
  • तृणमूल कांग्रेस से अलग धड़े को मान्यता नहीं देने की मांग की।
  • दूसरी पार्टी में शामिल होने वाले सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग।
  • संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए दो-तिहाई राजनीतिक दल की आवश्यकता बताई।
  • सत्ता पक्ष पर धनबल और एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
  • महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी, सौगत राय और डेरेक ओ’ब्रायन भी मुलाकात में मौजूद रहे।
  • अलग हुए नेताओं पर जनादेश और संविधान के अपमान का आरोप लगाया।

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