तमिलनाडु की सियासत में बड़ा उलटफेर, पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम डीएमके में हुए शामिल

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चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के शीर्ष पद पर रहे ओ. पन्नीरसेल्वम ने पार्टी छाेड़ दी है। पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने सत्तारूढ़ पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कडगम (डीएमके) में शामिल हाे गए हैं।

दरअसल, राज्य में पिछले कुछ दिनाें से एआईएडीएमके के खेमें में खलबली सी मची थी। पार्टी के पूर्व प्रमुख ओ. पन्नीरसेल्वम पिछले कुछ दिनों से डीएमके के समर्थन में बयान दे रहे थे। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम के नाराजगी झलक रही थी। शुक्रवार काे ओ पन्नीरसेल्वम ने राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की माैजूदगी में डीएमके की सदस्यता ग्रहण कर ली। पन्नीरसेल्वम तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्हें तमिल नेताजयललिता का वफादार साथी माना जाता है। पन्नीर के इस कदम से राज्य में नया ध्रुवीकरण हाे सकता है।

अप्रैल 2026 में संभावित विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य में पन्नीरसेल्वम का डीएमके में शामिल हाेना बड़ा राजनीति फेर बदल माना जा रहा है। पन्नीर के इस कदम से राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई हैं। तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और एआईएडीएमके दो प्रमुख और मजबूत दल माने जाते हैं और मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच रहता है। एआईएडीएमके ने भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के साथ गठबंधन किया है। इस गठबंधन में भाजपा, तमिल माणिला कांग्रेस और अंबुमणि रामदास की पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) जैसी पार्टियां शामिल हैं। वहीं डीएमके गठबंधन में 2021 के विधानसभा चुनाव में शामिल दलों के अलावा मक्कल नीधि मय्यम और डीएमडीके भी जुड़े हुए हैं।

एआईएडीएमके से निष्कासन

कई दौर की बातचीत के बाद पन्नीर और पलानी के धड़े फिर से एक हाे गए थे। उस समय एडप्पाडी पलानीस्वामी मुख्यमंत्री बने और ओ. पन्नीरसेल्वम उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन बाद में मतभेदों के कारण पलानीस्वामी ने पन्नीर को एआईएडीएमके से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद पन्नीर ने ‘एआईएडीएमके कार्यकर्ता अधिकार पुनर्प्राप्ति समिति’ बनाकर पार्टी को एकजुट करने का प्रयास किया। हालांकि पलानीस्वामी ने स्पष्ट कर दिया था कि ओ. पन्नीरसेल्वम को दोबारा पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा।्र्र

कई महीनाें से हाे रही थी वार्ता

बताया जाता है कि इसके बाद से ही ओ. पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने को लेकर बातचीत चल रही थी। 21 जुलाई 2025 को जब मुख्यमंत्री एमके स्टालिन मॉर्निंग वॉक पर थे, तब पन्नीर ने उनके आवास पर जाकर मुलाकात की थी। उस समय इसे “सिर्फ शिष्टाचार भेंट” बताया था।

राजनीतिक हलचल के बीच ओ. पन्नीरसेल्वम का डीएमके में शामिल होना अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसे लेकर पिछले कई महीनों से बातचीत चल रही थी। जयललिता के निधन के बाद ओ. पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री पद संभाला था। बाद में एआईएडीएमके में आंतरिक मतभेदों के चलते उन्होंने अलग होकर जयललिता की समाधि पर ‘धर्म युद्ध’ शुरू किया था। इसके बाद पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी। एक धड़ा एडप्पाडी के. पलानीस्वामी और दूसरा पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व में काम कर रहा था।

डीएमके में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

तमिलनाडु के अंतरिम बजट सत्र की समाप्ति के दिन भी पन्नीरसेल्वम ने सचिवालय में मुख्यमंत्री स्टालिन से मुलाकात की थी। इसके बाद हाल ही में पत्रकारों से बातचीत में भी पन्नीर ने कहा था कि डीएमके गठबंधन मजबूत है और आगामी विधानसभा चुनाव में भी डीएमके ही जीतेगी। इसके बाद से पन्नीर के डीएमके में जाने की चर्चा हाेने

लगी थी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि उन्हें डीमएके पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। डीएमके में उन्हें ‘संयुक्त महासचिव’ का पद मिलने की अटकलें लग रही हैं।

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