बिहार सरकार द्वारा सासामुसा चीनी मिल दोबारा शुरू करने की तैयारी, अपर मुख्य सचिव व निरानी ग्रुप चेयरमैन का दौरा

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गाेपालगंज। बिहार सरकार द्वारा राज्य की 25 बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने की कवायद अब जमीन पर उतरती दिख रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल और कर्नाटक आधारित निरानी ग्रुप के चेयरमैन दुर्गेश निरानी हेलीकॉप्टर से गोपालगंज पहुंचे और वर्षों से बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान गन्ना उद्योग विभाग के आयुक्त जेपीएन सिंह समेत कई स्थानीय अधिकारी मौजूद रहे।

निरीक्षण के बाद दुर्गेश निरानी ने कहा कि उनकी कंपनी कर्नाटक की प्रमुख औद्योगिक समूहों में शामिल है और बिहार में उनकी करीब नौ इकाइयां संचालित हैं। उन्होंने बताया कि रीगा चीनी मिल (सीतामढ़ी) को पुनः चालू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अब सासामुसा मिल की तकनीकी व व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।

निरानी ने दैनिक भास्कर को बताया कि सासामुसा मिल के पास लगभग 40-45 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जबकि कुछ जमीन लीज पर है। प्रस्ताव है कि यहां केवल गन्ने से चीनी उत्पादन ही नहीं, बल्कि चावल और मकई किसानों से बायो-प्रोडक्ट खरीदकर उसका भी उत्पादन किया जाए। इस बहु-उत्पाद मॉडल से गन्ना, धान और मकई—तीनों फसलों के किसानों को सीधा बाजार और बेहतर मूल्य मिल सकेगा। हालांकि विस्तारित परियोजना के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी, जिस पर राज्य सरकार से चर्चा की जाएगी।

अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल ने कहा कि निरीक्षण के दौरान किसानों और पूर्व कर्मचारियों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर भी विस्तार से बातचीत हुई। सरकार इस दिशा में गंभीर है और जल्द ही ठोस निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि पुनरुद्धार की प्रक्रिया में पुराने देनदारियों के समाधान को प्राथमिकता दी जाएगी।गौरतलब है कि दिसंबर 2017-18 में मिल परिसर में बॉयलर के पास हुए भीषण विस्फोट में 9 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस हादसे के बाद मिल पूरी तरह बंद हो गई और सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर ताला लग गया। किसानों का गन्ना औने-पौने दाम पर बाहर भेजना पड़ा और इलाके की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई, जिसको लेकर स्थानीय नेताओं ने मिल चालू करने को लेकर अनशन चालू किया था।

स्थानीय विधायक अमरेन्द्र कुमार पांडेय के पहले पर अनशन तोड़े गए। उसके बाद विधायक ने सीएम नीतिश कुमार से भेंट कर मिल चालू करने का आग्रह किया था। जिसके पहल पर वर्षों बाद मिल के पुनरुद्धार की संभावनाओं ने क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी है। यदि सरकार और कंपनी के बीच सहमति बनती है और उत्पादन शुरू होता है, तो यह न केवल गोपालगंज बल्कि आसपास के जिलों के किसानों, मजदूरों और छोटे व्यवसायियों के लिए भी बड़ा आर्थिक संबल साबित होगा। फिलहाल निगाहें सरकार और निवेशक समूह के अगले फैसले पर टिकी हैं कि क्या सासामुसा की चिमनी फिर धुआं उगलेगी या यह उम्मीद भी कागजों तक सिमट कर रह जाएगी ?

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