झारखंड विधानसभा में घोटाले की गूंज, राशन डीलर कमीशन और आउटसोर्सिंग पर तीखी बहस

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रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 17वें दिन बुधवार को सदन में राशन डीलरों के कमीशन और आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में अनियमितताओं का मुद्दा जोर-शोर से उठा। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

बरकट्ठा के विधायक अमित कुमार यादव ने परिवहन/वितरण प्रणाली (ट्रांसपोर्टेशन/डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम) के तहत मिलने वाले कमीशन को बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में डीलरों को मिलने वाला कमीशन पर्याप्त नहीं है, जिससे उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि डीलर दो किलोग्राम तक अनाज कम दे देते हैं, तो उसे गलत नहीं माना जाता, ऐसे में सरकार को उनकी स्थिति सुधारने के लिए कमीशन बढ़ाना चाहिए।

इस पर जवाब देते हुए राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि सरकार की ओर से डीलरों को प्रति यूनिट लगभग डेढ़ रुपये का कमीशन दिया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को तोड़-मरोड़ कर पेश करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार डीलरों के हितों को लेकर गंभीर है और व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में गड़बड़ी का आरोप

सदन में आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए मैनपावर नियुक्ति में अनियमितताओं को लेकर भी हंगामा हुआ। विधायक प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि कई कंपनियां युवाओं से पैसे लेकर नौकरी दिलाने का काम कर रही हैं, जिससे उनका शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए नियमावली तो बनाई है, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है। मीडिया में भी इस तरह की खबरें आने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

इस पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मियों के शोषण को रोकने के लिए कैबिनेट द्वारा स्पष्ट नियमावली बनाई गई है। उन्होंने बताया कि विभागों को मैनपावर की जरूरत होने पर जैप आईटी प्रणाली के माध्यम से सूचीबद्ध एजेंसियों का चयन किया जाता है और फिलहाल 14 एजेंसियां पैनल में शामिल हैं।

मंत्री ने कहा कि एजेंसियों का काम योग्यता और अनुभव के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करना है। यदि कोई एजेंसी निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे मांगती है, तो जांच में सही पाए जाने पर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

बहस के दौरान विधायक प्रदीप यादव ने फिर सवाल उठाया कि नियमावली के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

इस बीच मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भी माना कि यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि कई बार आरक्षण रोस्टर का सही तरीके से पालन नहीं हो पाता, जिस पर सख्ती से अंकुश लगाने की जरूरत है।

सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियों में झारखंड के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही विभागीय कार्यों में तेजी लाने के लिए इस व्यवस्था को जरूरी बताया गया, लेकिन इसमें पारदर्शिता और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया।

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