रांची: आयोग द्वारा जारी राजकोषीय सूचकांक 2026 में झारखंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के शीर्ष 10 राज्यों में जगह बना ली है। राज्य ने 50.5 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है, जो उसकी मजबूत वित्तीय प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।
सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि झारखंड ने वित्तीय अनुशासन के मामले में गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे आर्थिक रूप से अग्रणी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। इन राज्यों का स्कोर क्रमशः 49.9, 45.0 और 41.9 रहा।
यह सूचकांक राज्यों के राजस्व संग्रह, व्यय प्रबंधन और कर्ज नियंत्रण की क्षमता के आधार पर तैयार किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड की सफलता के पीछे संतुलित आर्थिक नीतियां और दूरदर्शी बजट प्रबंधन प्रमुख कारण रहे हैं।
पूंजीगत खर्च में वृद्धि
वित्त वर्ष 2023-24 में राज्य सरकार ने पूंजीगत व्यय के लिए 21,248 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 49 प्रतिशत अधिक है। इससे बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
राजकोषीय घाटा नियंत्रण में
राज्य ने अपने राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 2.8 प्रतिशत तक सीमित रखा है, जो निर्धारित मानकों के भीतर है।
कर्ज प्रबंधन मजबूत
रिपोर्ट में कहा गया है कि झारखंड का कर्ज स्तर और उस पर ब्याज का बोझ नियंत्रित स्थिति में है, जो भविष्य की वित्तीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।
शीर्ष राज्यों की सूची (स्कोर सहित):
- ओडिशा – 73.1
- गोवा – 54.7
- झारखंड – 50.5
- गुजरात – 49.9
- महाराष्ट्र – 45.0
- उत्तर प्रदेश – 41.9
यह उपलब्धि झारखंड की बदलती आर्थिक तस्वीर और बेहतर वित्तीय अनुशासन का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।





