आदिवासी संगठनों का झारखंड बंद: रांची और खूंटी में हाई अलर्ट, अपराधियों के जल्द गिरफ्तारी की मांग

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रांचीः आदिवासी संगठनों ने पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में आज झारखंड बंद का आह्वान किया है। इसे लेकर शुक्रवार की शाम को कई जिलों में मशाल जुलूस निकाला गया। संगठनों ने लोगों से पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में झारखंड बंद को सफल बनाने की अपील की है। इधर, बंद के मद्देनजर रांची और खूंटी के कई स्कूलों में शनिवार को छुट्टी रहेगी।

बंद समर्थक संगठनों ने कहा है कि पड़हा राजा की हत्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि जमीन, जंगल-जल के रक्षक के रूप में उनकी संघर्षपूर्ण आवाज को दबाने की सुनिश्चित साजिश थी। इधर पुलिस प्रशासन ने बंद को लेकर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए हैं। पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता, शूटर व भूमि माफिया अभी भी फरार हैं। इधर, बंद को लेकर पुलिस अलर्ट मोड में है।

बंद को आदिवासी समन्वय समिति खूंटी, आदिवासी बचाओ मोर्चा, मानकी मुंडा संघ चाईबासा, आदिवासी जनपरिषद, आदिवासी महासभा, केंद्रीय सरना समिति, आदिवासी बचाओ युवा मोर्चा, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, सरना सोंगोम समिति, एदेल सांगा पड़हा समिति, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, संयुक्त बाइस पड़हा, नगड़ी जमीन बचाओ समिति, आदिवासी अधिकार संरक्षण समिति, आदिवासी लोहरा समाज, भारत मुंडा समाज, महली जनजातीय विकास मंच, मांझी परगना सरदार महासभा जामताड़ा, झारखंड प्रदेश आदिवासी सरना-पड़हा समाज, मुन्ना पतरा चकला, झारखंड आदिवासी संयुक्त मोर्चा, आदिवासी छात्रसंघ, कांके रोड सरना समिति, संपूर्ण आदिवासीसमाज तमाड़ व अन्य का समर्थन प्राप्त है। इधर, बंद को देखते हुए जिलों में सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं।

आदिवासी नेताओं ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार द्वारा 23 दिसंबर 2025 को पारित पेसा कानून की नियमावली रूढ़िजन्य पारंपरिक ग्राम सभाओं के अनुरूप नहीं है। इससे आदिवासियों की पारंपरिक संस्कृति, सभ्यता और जमीनों को खतरा उत्पन्न हो गया है। समस्त पारंपरिक एवं सरना आदिवासी संगठनों ने मांग किया कि पड़हा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड के सभी दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी कर उन्हें कड़ी सजा दी जाए।

साथ ही पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा और सुरक्षा प्रदान की जाए। भूमि माफियाओं के खिलाफ विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने, सीएनटी-एसपीटी एक्ट का सख्ती से पालन करने, पेसा कानून को मजबूत करने तथा ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार देने की मांग भी उठाई गई।

इसके अलावा आदिवासी कार्यकर्ताओं और नेताओं को पुलिस सुरक्षा देने, राज्य में हुए नए-पुराने भूमि घोटालों की जांच के लिए उच्चस्तरीय आयोग गठित करने और लंबित भूमि विवाद मामलों में त्वरित कार्रवाई की मांग की गई। आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो झारखंड बंद का व्यापक असर देखने को मिलेगा।

कहां क्या असर दिख रहा है :
रांची : राजधानी में बंद के कारण खूंटी और आसपास जाने वाले सभी मार्गों पर बस सेवा बंद है। केवल हजारीबाग और रामगढ़ रूट पर कुछ बसें चल रही हैं। पुलिस ने शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। 1200 अतिरिक्त पुलिस बल प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहे, संवेदनशील स्थलों और उपासना स्थलों पर तैनात हैं। ड्रोन कैमरा टीम भी शहर में सतर्क है।

खूंटी और सिमडेगा : खूंटी में बंद का व्यापक असर दिख रहा है। बंद समर्थकों ने खूंटी, तोरपा, मारचा, कर्रा, रनिया सहित अन्य जगहों पर सड़क जाम कर दिया है। इससे सड़कों पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बंद के कारण जिला मुख्यालय के अलावा तोरपा, तपकरा, मुरहू, अड़की, कर्रा सहित अन्य ग्रामीण इलाकों में सभी दुकान, व्यापारिक प्रतिष्ठान सुबह से ही बंद रहे। यात्री वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहा। सिमडेगा से रांची जाने वाली बसें नहीं चल रही हैं। बस न चलने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कुछ लोग छोटी गाड़ियों से रांची जा रहे हैं।

पलामू : बंद का कोई असर नहीं दिख रहा है। यात्री बसें सामान्य रूप से चल रही हैं।

हजारीबाग : बंद का असर नहीं, वाहन और बसें सुचारू रूप से चल रही हैं। बाहरी गाड़ियों की संख्या थोड़ी कम है।

कोडरमा : बंद का असर नहीं दिख रहा है। यात्री बसें सामान्य रूप से परिचालित हैं। ट्रेनों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

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