PM मोदी के साथ नाश्ता बैठक के बाद बढ़ी अटकलें, अबू ताहेर-खलीलुर ने कहा- भाजपा में नहीं होंगे शामिल; NCPIT में बने रहने पर भी नहीं दिया स्पष्ट जवाब

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कोलकाता, 08 अगस्त — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिल्ली में नाश्ता बैठक में शामिल होने के एक दिन बाद नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के सांसद अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान ने अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर सफाई दी है। दोनों सांसद शनिवार को नवान्न पहुंचे और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। बैठक के बाद दोनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वे भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं।

‘लोकसभा रिकॉर्ड में अब भी तृणमूल के सांसद’
अबू ताहेर खान ने कहा कि लोकसभा के रिकॉर्ड में अभी भी उन्हें अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सांसद के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष भी उन्हें तृणमूल कांग्रेस के सांसद के तौर पर संबोधित करते हैं और संसद में उनके नाम के साथ तृणमूल कांग्रेस का उल्लेख है।

उन्होंने कहा कि एनसीपीआई फिलहाल कागज पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की औपचारिक सहयोगी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि राजग की बैठक में उन्हें आमंत्रित किया जाता, तो वे उसमें शामिल होते, लेकिन भाजपा में शामिल होने का कोई फैसला नहीं है।

‘भविष्य में क्या होगा, समय बताएगा’
एनसीपीआई में बने रहने या भविष्य में किसी दूसरे राजनीतिक विकल्प पर जाने के सवाल पर दोनों सांसदों ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वे आगे पार्टी में रहेंगे या नहीं, इसका फैसला समय के साथ स्पष्ट होगा।

दोनों सांसदों के इस बयान के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। इससे पहले अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान ने राजग और भाजपा से दूरी की बात कही थी। हालांकि बाद में तीनों नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद अबू ताहेर और खलीलुर प्रधानमंत्री मोदी के साथ नाश्ता बैठक में शामिल हुए।

सीएम शुभेंदु से एसआईआर और लाउडस्पीकर मुद्दे पर चर्चा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ बैठक में मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और राज्य में मस्जिदों से माइक एवं लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने कहा कि बड़ी संख्या में गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को SIR प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि पहले चरण में करीब सात लाख लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।

20 लाख लोगों के लिए समयसीमा बढ़ाने की मांग
दोनों सांसदों ने बाकी करीब 20 लाख लोगों के लिए आवेदन जमा करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष रखी। उनका कहना है कि पर्याप्त जानकारी और समय के अभाव में कई पात्र लोग प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं।

मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने पर जताई चिंता
मस्जिदों से माइक और लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई को लेकर दोनों सांसदों ने पुलिस की भूमिका पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पुलिस की कथित अति-सक्रियता के कारण एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

सांसदों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसी विशेष समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाएगा और मामले को गंभीरता से देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया था।

‘अच्छा काम होगा तो समर्थन करेंगे, गलत हुआ तो विरोध’
दोनों सांसदों ने कहा कि सरकार अगर जनहित में अच्छा काम करती है तो वे उसका समर्थन करेंगे। हालांकि, मुर्शिदाबाद समेत पूरे पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का वे विरोध करेंगे।

उन्होंने कहा कि उनका रुख किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से अधिक आम लोगों के मुद्दों पर केंद्रित है। दोनों सांसदों के बयानों के बाद उनकी आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर तस्वीर आने वाले दिनों में और स्पष्ट होने की संभावना है।

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