JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत पर सुनवाई पूरी, कोर्ट ने आदेश रखा सुरक्षित

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रांची, 02 सितंबर। जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्य सचिव एवं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत याचिका पर बुधवार को CID की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। मामले में बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

बचाव पक्ष ने कहा- ख्यांग्ते के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं

ख्यांग्ते की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने अदालत में पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने दलील दी कि ख्यांग्ते के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। अधिवक्ताओं के अनुसार, उनके ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान भी ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे कथित घोटाले में उनकी संलिप्तता साबित हो सके। बचाव पक्ष ने उनकी गिरफ्तारी को भी अवैध बताया और जमानत देने की मांग की।

CID ने TDPL को परीक्षा का काम देने में भूमिका का लगाया आरोप

वहीं, CID की ओर से अदालत में ख्यांग्ते की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि TDPL को परीक्षा आयोजन का काम सौंपने में ख्यांग्ते की भूमिका रही थी।

CID के अनुसार, TDPL की ओर से आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही थी और इसकी जानकारी ख्यांग्ते को थी। इसके बावजूद उन्होंने कथित अनियमितताओं को रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

पिछली सुनवाई के दौरान CID की ओर से अदालत में केस डायरी भी पेश की गई थी।

10 अगस्त को हुई थी ख्यांग्ते की गिरफ्तारी

CID ने एल ख्यांग्ते को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि परीक्षा आयोजन से जुड़ी कथित अनियमितताओं के बदले ख्यांग्ते ने TDPL से करीब 2 करोड़ रुपये कमीशन लिया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की गई थी। पूछताछ पूरी होने के बाद से वह जेल में बंद हैं।

कांड संख्या 16/2026 में 20 से अधिक गिरफ्तारियां

परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इसी मामले की जांच के दौरान ख्यांग्ते की गिरफ्तारी हुई। पुलिस जांच के क्रम में अब तक 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

अभय तिवारी के बयान में ख्यांग्ते का नाम

मामले में कथित किंगपिन अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान का भी जांच एजेंसी ने हवाला दिया है। CID के अनुसार, अधिकारियों के समक्ष दिए गए बयान में अभय तिवारी ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की कथित संलिप्तता का उल्लेख किया है।

CID का दावा है कि अभय तिवारी ने TDPL को परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के रूप में चयनित किए जाने में ख्यांग्ते की अहम भूमिका होने की बात कही है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत के स्तर पर होना बाकी है।

जमानत पर अब अदालत के आदेश का इंतजार

दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब ख्यांग्ते की जमानत को लेकर अदालत के आदेश का इंतजार है।

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