रांची, 05 अक्टूबर। झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह सोमवार को रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में आयोजित हुआ। समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर 207 सफल विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई, जबकि विभिन्न संकायों में सर्वोच्च स्थान हासिल करने वाले पांच मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ विशिष्ट अतिथि और उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं सेवानिवृत्त आईपीएस जीके गोस्वामी सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति राहुल पुरवार, रजिस्ट्रार डॉ. हेमेंद्र कुमार भगत, शिक्षक, अधिकारी, विद्यार्थी और उनके अभिभावक भी समारोह में उपस्थित रहे।
दीक्षांत समारोह नई जिम्मेदारी की शुरुआत : राज्यपाल
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का पड़ाव नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा की नई जिम्मेदारी की शुरुआत है।
उन्होंने विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों और गुरुजनों को भी बधाई दी। राज्यपाल ने कहा कि झारखंड के युवाओं में देश सेवा का स्वाभाविक उत्साह और चुनौतियों का सामना करने का साहस रहा है। इस ऊर्जा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और सही दिशा से जोड़ने की जरूरत है।
साइबर अपराध से लेकर डीपफेक तक नई चुनौतियां
राज्यपाल ने कहा कि मौजूदा दौर में सुरक्षा व्यवस्था के सामने चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर अपराध, डिजिटल धोखाधड़ी, डेटा सुरक्षा, वित्तीय अपराध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग, डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग, भ्रामक सूचनाएं और साइबर हमले जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का सामना केवल पारंपरिक तरीकों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए युवाओं को तकनीकी ज्ञान के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विश्लेषण क्षमता और निरंतर सीखने की आदत विकसित करनी होगी।
तकनीक को शक्ति और विवेक को मार्गदर्शक बनाएं
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि तकनीक को अपनी शक्ति और विवेक को अपना मार्गदर्शक बनाएं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल करते समय कानून, मानव गरिमा, नागरिक अधिकार और निजता का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों को भी जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि तकनीकी क्षमता तभी सार्थक है, जब उसका इस्तेमाल समाज और राष्ट्र के हित में जिम्मेदारी के साथ किया जाए।
साइबर अपराध की पहचान से झारखंड को बाहर लाने का आह्वान
संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि झारखंड के किसी जिले या क्षेत्र की पहचान साइबर अपराध से नहीं जुड़नी चाहिए। जब देश में साइबर अपराध की रोकथाम की चर्चा हो तो झारखंड का नाम अग्रणी राज्यों में लिया जाना चाहिए।
उन्होंने युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में वे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। तकनीकी रूप से दक्ष युवा साइबर अपराध की रोकथाम, डिजिटल सुरक्षा और आधुनिक पुलिसिंग को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं।
समाधानपरक शोध को बढ़ावा देने पर जोर
राज्यपाल ने झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में सुरक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में समाधानपरक शोध को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने विशेष रूप से साइबर अपराध, अपराध मनोविज्ञान, महिला एवं बाल सुरक्षा, वित्तीय अपराध, नशीले पदार्थों की रोकथाम, आपदा प्रबंधन और आधुनिक पुलिसिंग जैसे विषयों पर शोध को प्रोत्साहित करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि शोध केवल अकादमिक गतिविधि तक सीमित न रहे, बल्कि उसका लाभ पुलिस प्रशासन और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में भी दिखाई देना चाहिए।
पुलिस, रक्षा संस्थानों और उद्योग जगत से अकादमिक संबंध मजबूत हों
राज्यपाल ने पुलिस प्रशासन, रक्षा संस्थानों, तकनीकी संस्थानों और उद्योग जगत के साथ विश्वविद्यालय के अकादमिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों को फील्ड ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और केस स्टडी के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों और सुरक्षा क्षेत्र की चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी।
मनोहर पर्रिकर की राष्ट्र सेवा की भावना विश्वविद्यालय के लिए प्रेरणा
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय की आधारशिला पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर ने रखी थी। उनकी सादगी, कर्मठता और राष्ट्र सेवा की भावना विश्वविद्यालय के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को सुरक्षा शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान को लगातार मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। सुरक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षित और दक्ष युवा देश के विकास के लिए आवश्यक सुरक्षा, स्थिरता और विश्वास का वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता मिलने पर विनम्र रहें और चुनौतियों के समय अपने नैतिक मूल्यों से समझौता न करें।
युवाओं के लिए खुला आकाश, जितनी ऊंची उड़ान चाहें भरें : संजय सेठ
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि उनके लिए खुला आकाश है और वे जितनी ऊंची उड़ान भरना चाहें, भर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बदलते कार्यक्षेत्र में युवाओं को नवाचार की जरूरत होगी। इसके लिए ऊर्जा, नई सोच और कुछ नया करने की इच्छा जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपनी प्रतिभा और क्षमताओं का इस्तेमाल नए समाधान विकसित करने में करने का आह्वान किया।
‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना हमेशा बनाए रखें
संजय सेठ ने विद्यार्थियों से कहा कि भविष्य में वे कितनी भी प्रतिष्ठा हासिल करें, लेकिन ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को हमेशा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल क्रांति के दौर में युवाओं के सामने बड़ी संभावनाएं हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से इन क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को विकसित कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।
पारदर्शिता और ईमानदारी को जीवन का हिस्सा बनाएं
रक्षा राज्य मंत्री ने युवाओं को अपने कार्यक्षेत्र में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ करें।
संजय सेठ ने युवाओं से नशा मुक्त भारत के अभियान में भी सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा अपनी ऊर्जा और क्षमता का सकारात्मक इस्तेमाल करते हुए समाज में जागरूकता पैदा कर सकते हैं।
207 विद्यार्थियों को उपाधि, पांच को गोल्ड मेडल
दीक्षांत समारोह में 207 सफल विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं। वहीं अलग-अलग संकायों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले पांच मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों के चेहरे पर उपलब्धि की खुशी साफ दिखाई दी। अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी यह अवसर गौरवपूर्ण रहा।






