आस्था, इतिहास और पर्यटन का संगम: गौतम स्थान को मिले राष्ट्रीय पहचान

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पटना। सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड स्थित गौतम स्थान को ‘रामायण सर्किट’ में शामिल कराने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। छपरा की विधायक छोटी कुमारी ने बिहार विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए सरकार से इन पौराणिक स्थलों के समुचित विकास और ‘रामायण सर्किट’ में शामिल करने की मांग की है।

विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान विधायक ने कहा कि छपरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गौतम स्थान को भगवान हनुमान जी का ननिहाल माना जाता है। वहीं समीपवर्ती सिमरिया में स्थित श्रृंगी ऋषि आश्रम भी रामायण काल से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।

उन्होंने कहा कि मान्यता है कि इसी तपोभूमि पर भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से माता अहिल्या का उद्धार हुआ था। गौतम ऋषि की यह पावन स्थली न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

यह क्षेत्र पौराणिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सोनपुर मेले की तर्ज पर लोग यहां स्नान करने पहुंचते हैं और भव्य मेला का आयोजन होता है।

सरकार द्वारा गोदना सेमारिया मेला समारोह का भी आयोजन कराया जाता है, जो इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ करता है।

विकास से खुलेगा पर्यटन का मार्ग

विधायक ने सरकार से मांग की कि गौतम स्थान और श्रृंगी ऋषि आश्रम को रामायण सर्किट योजना में शामिल कर इन्हें पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र में आधारभूत संरचना का विकास होगा, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

यदि इन स्थलों को रामायण सर्किट में शामिल किया जाता है, तो सारण की यह पौराणिक धरोहर राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान बना सकती है।

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