मौसम में बदलाव आते ही अक्सर घरों में बच्चों के बीच सर्दी, खांसी और बुखार का सिलसिला शुरू हो जाता है। छोटे बच्चे संक्रमण की चपेट में सबसे जल्दी आते हैं क्योंकि उनका शरीर बड़ों की तुलना में अधिक संवेदनशील होता है। ऐसे में पेरेंट्स के मन में हमेशा यह सवाल रहता है कि आखिर बच्चों को बार-बार बीमार पड़ने से कैसे बचाएं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसका एकमात्र और सबसे प्रभावी रास्ता है—बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना।
अमृत समान है मां का दूध
शिशु की इम्युनिटी की पहली नींव ‘मां का दूध’ है। जन्म के बाद शुरुआती पीला गाढ़ा दूध बच्चों को निमोनिया, दस्त, एलर्जी और यहां तक कि दिमागी बुखार जैसी खतरनाक बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है। कम से कम 6 महीने तक केवल स्तनपान कराना बच्चे के लिए किसी जीवन रक्षक दवा से कम नहीं है।
थाली में हो सतरंगी आहार
बच्चों की डाइट में गाजर, हरी बीन्स, संतरा और स्ट्रॉबेरी जैसे फल-सब्जियां जरूर शामिल करें। इनमें मौजूद विटामिन-सी और कैरोटीन शरीर की रक्षा करने वाली कोशिकाओं को मजबूत बनाते हैं। जंक फूड के बजाय प्रकृति के करीब वाला भोजन ही बच्चों का असली सुरक्षा कवच है।
नींद से समझौता पड़ेगा भारी
आजकल के डिजिटल युग में बच्चों की नींद कम होती जा रही है, जो उनकी इम्युनिटी के लिए घातक है। एक नवजात को करीब 18 घंटे और बढ़ते बच्चों को कम से कम 10 से 12 घंटे की गहरी नींद मिलनी चाहिए। नींद के दौरान ही शरीर खुद की मरम्मत करता है और बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित करता है।
सावधानी ही बचाव है
घर में धूम्रपान करना बच्चों के लिए जहर के समान है। सिगरेट का धुआं बच्चों की नाजुक कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इसके अलावा, छोटी-छोटी बात पर बच्चों को एंटीबायोटिक देने से बचें; ये दवाएं अक्सर बैक्टीरिया पर काम करती हैं जबकि बचपन की अधिकांश बीमारियां वायरस के कारण होती हैं।
बच्चों को बचपन से ही हाथ धोने की आदत डालें। उनके खिलौनों, तौलिये और रुमाल की सफाई का विशेष ध्यान रखें। याद रखें, एक मजबूत इम्युनिटी ही आपके बच्चे के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की गारंटी है।





