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बलिदान की धरती सेरेंगसिया में सीएम सोरेन ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि, कोल्हान प्रमंडल को मिला 398 करोड़ की योजनाओं की सौगात

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चाईबासा: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पश्चिमी सिंहभूम जिलांतर्गत टोटो प्रखंड में आयोजित सेरेंगसिया के शहीदों को नमन-सह-परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास एवं परिसंपति वितरण समारोह में सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। हर वर्ष की भांति इस बार भी शूरवीरों की धरती-सेरेंगसिया में अपने अमर वीर शहीदों को नमन और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं। यह दिन हमें अपने वीरों के बलिदान की गाथा को याद दिलाता है । इस अवसर पर हम सभी अपने अमर वीर शहीदों के आदर्श और सपनों को पूरा करने का संकल्प लें।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत टोटो प्रखंड में सेरेंगसिया के शहीदों को नमन-सह-परियोजनाओं के शिलान्यास-उद्घाटन एवं परिसंपत्ति वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सेरेंगसिया शहीद स्मारक पर शीश नवाकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुए संघर्ष के महानायक पोटो हो समेत तमाम वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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197 विकास योजनाओं की दी सौगात

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 398 करोड़ 19 लाख 35 हज़ार 298 रुपए की लागत से 197 विकास योजनाओं का उद्घाटन- शिलान्यास किया. इसमें 224 करोड़ 78 लाख 77 हज़ार 843 रुपए की लागत से 122 योजनाओं का शिलान्यास एवं 173 करोड़ 40 लाख 57 हज़ार 405 रुपए की लागत से 75 महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्घाटन शामिल है। इसके साथ विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं के 3 लाख 77 हजार 256 लाभार्थियों के बीच 637 करोड़ 43 लाख 13 हज़ार 500 रुपए की परिसंपत्तियां बांटी. इसके अलावा 1479 युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किया।

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झारखंड हमेशा से शूरवीरों की धरती रही है

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड हमेशा से शूरवीरों की धरती रही है। साल का कोई भी ऐसा दिन नहीं होता है, जब हम किसी ना किसी वीर शहीद का शहादत दिवस मनाते हैं। अपने वीर शहीदों का सम्मान हमारी परंपरा में शामिल है। इस परंपरा को हम और मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं ताकि हमारे पूर्वजों में जो शहादत दी थी, उसे आने वाली पीढ़ी को बता सकें।

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आजादी की लड़ाई से पहले आदिवासियों ने किया संघर्ष

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश में आजादी की लड़ाई शुरू भी नहीं हुई थी उस वक्त हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था। कोल्हान का कोल विद्रोह इतिहास के पन्नों में दर्ज है, क्योंकि हमारे आदिवासी और पूर्वजों ने अपनी पहचान, जल – जंगल- जमीन की रक्षा और अंग्रेजों के अन्याय, शोषण और जुल्म के खिलाफ संघर्ष में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। संघर्षों के महानायक भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हु, नीलांबर पीतांबर और पोटो हो जैसे अनेकों वीरों और उनकी शहादत की गवाह यह धरती रही है।

विकास के हर मोर्चे पर तेज गति से बढ़ रहे आगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार हेडक्वार्टर से नहीं, गांवों से चल रही है। आज सरकार और उसकी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही है। लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है। हमारी सरकार की नीतियों और योजनाओं का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। आज झारखंड विकास के हर मोर्चे पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से मजबूत होना होगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक आप आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से मजबूत नहीं होंगे तब तक आगे नहीं बढ़ सकते हैं। यही वजह है कि हमारी सरकार हर किसी को इस दृष्टिकोण से सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे अपने बच्चे- बच्चियों को हर हाल में पढ़ाएं। इसमें सरकार आपको हर स्तर पर सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए कई योजनाएं चल रही है। आज हम बच्चों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर उत्कृष्ट शिक्षा दे रहे हैं। उन्हें मेडिकल और इंजीनियरिंग समेत अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के लिए निः शुल्क कोचिंग दी जा रही है। विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए शत प्रतिशत स्कॉलरशिप दी जा रही है। हमारी कोशिश यही है यहां के बच्चे भी ऊंचे पदों पर पहुंच सके।

आधी आबादी को दे रहे सम्मान, बना रहे सशक्त – हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधी आबादी को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना हमारा संकल्प है। मुख्यमंत्री मइंया सम्मान योजना इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा है। इस योजना के माध्यम से 18 से 50 वर्ष तक की महिलाओं को हर वर्ष तीस हजार रुपए दे रहे हैं ताकि वे अपने बल पर अपने को खड़ा कर सकें। ऐसी ही कई और योजनाएं हैं, जिनके जरिए हम राज्य वासियों को सहूलियत और सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

असम में आदिवासियों पर हो रहा अत्याचार : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने असम राज्य में आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि एक ही देश में आदिवासियों के साथ दो तरह का कानून लागू किया जा रहा है। असम में आदिवासियों को ओबीसी और सामान्य वर्ग का दर्जा दिया जा रहा है, जबकि झारखंड में आदिवासी अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आते हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में असम में 25-30 आदिवासी गांवों को जलाया गया और कई लोगों की जान गई। वहां के आदिवासी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुजी शिबू सोरेन भी आदिवासियों की मदद के लिए असम जाते रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि झारखंड के आदिवासी अपने भाइयों के संघर्ष में उनके साथ खड़े हैं और जरूरत पड़ने पर पूरा झारखंड उनके समर्थन में खड़ा होगा।

मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करें और उन्हें इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस व आईपीएस बनाएं। सरकार सावित्रीबाई फुले योजना के माध्यम से स्कूली बच्चों को सहायता दे रही है। उन्होंने कहा कि 18 से 50 वर्ष तक की महिलाओं को ढाई हजार रुपये प्रतिमाह देना सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।कार्यक्रम में मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा एवं लाभार्थी उपस्थित रहे। श्रद्धांजलि सभा और विकास कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण भावुकता और उत्साह से भरा रहा।

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