डीजी नियुक्ति मामले में कैट का आदेश, यूपीएससी को 48 घंटे में भेजा जाए प्रस्ताव

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में पुलिस महानिदेशक (डीजी) की स्थायी नियुक्ति को लेकर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कैट की प्रिंसिपल बेंच ने बुधवार को आदेश दिया कि राज्य सरकार 23 जनवरी तक डीजी नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) को भेजना होगा।

आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी योग्य आईपीएस अधिकारी को डीजी पद से वंचित नहीं कर सकती। कैट ने यह भी कहा कि प्रस्ताव मिलने के बाद यूपीएससी को 28 जनवरी तक अपनी एम्पैनलमेंट कमेटी की बैठक कर पैनल तैयार करना होगा और 29 जनवरी तक यह पैनल राज्य सरकार को भेजना अनिवार्य होगा।

राजेश कुमार 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में राज्य के जनशिक्षा प्रसार एवं पुस्तकालय सेवा विभाग के प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उनका सेवा-काल कुछ ही दिनों में समाप्त होने वाला है। अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया था कि डीजी बनने की सभी योग्यताएं होने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया। ट्रिब्यूनल ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा कि किसी भी योग्य अधिकारी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि, वर्तमान कार्यवाहक डीजी राजीव कुमार 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिसके चलते राज्य में स्थायी डीजी की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा भेजा गया डीजी पद के लिए अधिकारियों का पैनल यूपीएससी ने यह कहते हुए लौटा दिया था कि नियमों के अनुसार, स्थायी डीजी के सेवानिवृत्त होने से कम से कम तीन महीने पहले पैनल भेजा जाना चाहिए था।

यूपीएससी के अनुसार, पूर्व स्थायी डीजी मनोज मालवीय दिसंबर, 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे और उसी तिथि को ‘डेट ऑफ वेकेंसी’ माना गया। नियमों के तहत सितंबर, 2023 तक पैनल भेजा जाना चाहिए था, जबकि राज्य सरकार ने 27 दिसंबर को प्रस्ताव भेजा था, जिसे प्रक्रियागत त्रुटि मानते हुए लौटा दिया गया।

कैट के ताजा निर्देश के अनुसार, राज्य सरकार को 23 जनवरी तक ईमेल या विशेष दूत के माध्यम से डीजी पद के लिए नामों का प्रस्ताव दोबारा यूपीएससी को भेजना होगा। इसके बाद यूपीएससी 28 जनवरी तक बैठक कर पैनल तैयार करेगा और 29 जनवरी तक राज्य सरकार को भेजेगा। ट्रिब्यूनल ने यह भी निर्देश दिया है कि पैनल मिलने के बाद राज्य सरकार को यथाशीघ्र डीजी नियुक्ति पर अंतिम निर्णय लेना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है।

उल्लेखनीय है कि, नियमों के अनुसार, डीजी पद के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजी जाती है, जहां से तीन नामों का पैनल तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जाता है। इसके बाद राज्य सरकार इन तीनों में से एक नाम का चयन करती है। स्थायी डीजी की नियुक्ति की प्रक्रिया में केंद्रीय गृह सचिव या उनके नामित प्रतिनिधि, किसी केंद्रीय अर्धसैनिक बल के डीजी, यूपीएससी का प्रतिनिधि, संबंधित राज्य के मुख्य सचिव और निवर्तमान स्थायी डीजी शामिल होते हैं।

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