“चरैवेति चरैवेति” मंत्र के साथ पीएम मोदी का संदेश: निरंतर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को भारतीय दर्शन और कर्मयोग की भावना को रेखांकित करते हुए प्राचीन संस्कृत श्लोक “चरैवेति चरैवेति” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास, परिश्रम और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा ही व्यक्ति और राष्ट्र को प्रगति के पथ पर ले जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, “चरैवेति चरैवेति चरन्वै मधु विन्दति। सूर्यास्य पश्य श्रेमाणं न मामार न जीर्यति॥” प्रधानमंत्री ने इसका भावार्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जो निरंतर चलता रहता है, वही सफलता का मधु प्राप्त करता है। सूर्य के समान कर्मशील व्यक्ति न तो थकता है और न ही समय से पराजित होता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के समय में यह विचार विशेष रूप से प्रासंगिक है, जब भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार और विकास के नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे चुनौतियों से घबराने के बजाय निरंतर सीखते हुए और परिश्रम करते हुए आगे बढ़ें।

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