बीएमसी चुनाव में बीजेपी-शिंदेसेना बनी सिकंदर, उद्धव-राज की जोड़ी फेल

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मुंबई। महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नंबर वन पार्टी बन कर उभरी है। इन नगर निगमों कुल 2869 पार्षदों में अकेले भाजपा के 1441 पार्षद चुनाव जीतने में सफल हुए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने विजयी भाजपा पार्षदों का अभिनंदन किया है।

महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में शुक्रवार को मतगणना के बाद राज्य चुनाव आयोग की ओर से जारी विजई पार्षदों के आंकड़ों के अनुसार भाजपा के अकेले 1441 पार्षद चुने गए हैं। इसी तरह शिंदे समूह की शिवसेना के 408 पार्षद चुने गए हैं और शिवसेना शिंदे समूह दूसरी बड़ी पार्टी बन गई है। जबकि कांग्रेस के 317 पार्षद चुने गए हैं और कांग्रेस राज्य में तीसरी पार्टी बन गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार) के 164 पार्षद और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के154पार्षद, एमआईएम के 125 पार्षद, राकांपा एसपी के 36 पार्षद , मनसे के 13 पार्षद और 221 निर्दलीय पार्षद चुने गए हैं।

राज्य चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार भाजपा अपने बल पर 13 नगर निगमों में महापौर बनाने जा रही है। जबकि करीब 12 नगर निगमों में भाजपा सत्ता में सहभागी रहने वाली है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने भाजपा के सभी नगरसेवकों को जीत की शुभकामना दी है। रविंद्र चव्हाण ने आज कहा कि नगर निगम चुनावों में इतनी बड़ी जीत स्वच्छ प्रशासन और विकास के नाम पर मिली है। इसलिए भाजपा के टिकट पर विजयी पार्षद विकास और स्वच्छ प्रशासन को प्रधानता देंगे।

जानिए उद्धव और राज ठाकरे के हार के प्रमुख कारण

राज ठाकरे के साथ गठबंधन की रणनीतिक भूल
उद्धव ने कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) के बजाय राज ठाकरे को चुना, जो पहले से कमजोर थे। राज की आक्रामक ‘मराठी अस्मिता’ और पुरानी विभाजनकारी बयानबाजी (जैसे ‘लुंगी उठाओ, पुंगी बजाओ’) ने उत्तर भारतीय, गुजराती, मुस्लिम और दक्षिण भारतीय मतदाताओं को दूर किया। मुंबई में मराठी वोटर 40% से कम हैं, जबकि गैर-मराठी बहुमत वाले इलाकों में यह गठबंधन घातक साबित हुआ।

मराठी मानूस’ एजेंडा की पुरानी हो चुकी अपील
ठाकरों ने हिंदी थोपने और बाहरी लोगों के खिलाफ मुद्दा उठाया, लेकिन मुंबई की जनता अब विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार को प्राथमिकता दे रही है। बीजेपी ने हिंदी विवाद को संभालते हुए फडणवीस के नेतृत्व में ‘विकास ब्रांड’ पेश किया, जो ज्यादा असरदार रहा।

बीजेपी की मजबूत संगठनात्मक रणनीति और फडणवीस का प्रभाव
देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में ठाकरों को सीधी चुनौती दी। महायुति ने हिंदुत्व और विकास को जोड़कर वोट बैंक मजबूत किया। शिंदे गुट को 27-30 सीटें मिलीं, लेकिन बीजेपी अकेले सबसे बड़ी पार्टी बनी।

पुराने सहयोगियों का साथ छूटना
उद्धव की 25-30 साल की सत्ता बीजेपी और आरपीआई (ए) जैसे सहयोगियों पर टिकी थी। अब इनके बिना वे कमजोर पड़ गए। राज के साथ आने से मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक वोटर भी नाराज हुए।

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