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पेरिस में बीएचयू के शिक्षक की भित्ति चित्र को मिली सराहना, विश्वविद्यालय के लिए गौरव का पल

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वाराणसी। भारत की सांस्कृतिक उपस्थिति को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करने की दिशा में काशी हिंदू विश्वविद्यालय को एक और उपलब्धि मिली है। भारतीय कलाकार एवं भित्ति चित्रकार तथा दृश्य कला संकाय बीएचयू के शिक्षक प्रो. सुरेश के. नायर ने फ्रांस में एक सांस्कृतिक दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। भारतीय दृश्य कला की समृद्धि और विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने वाली यह पहल भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के प्रायोजन में संपन्न हुई। इस परियोजना के तहत प्रो. नायर ने भारतीय दूतावास, स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र (एसवीसीसी), पेरिस में एक भव्य भित्ति चित्र का सृजन किया।

यह भित्ति चित्र भारत की समृद्ध दृश्य एवं कला परंपराओं को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें कथकली, मणिपुरी नृत्य, कथक, थेय्यम, भरतनाट्यम तथा छाया कठपुतली कला जैसी शास्त्रीय एवं लोक कला विधाओं का सुंदर समन्वय किया गया है। पारंपरिक अलंकरण शैली में स्वर्णिम आभा के साथ निर्मित यह कृति भारतीय कला की गहन सौंदर्यात्मक चेतना को प्रतिबिंबित करती है। यह जानकारी विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क कार्यालय ने दी। बताया गया कि 10.5 फीट गुणे 33.8 फीट के विशाल आकार में निर्मित यह भित्ति चित्र महज़ 10 दिनों की सघन अवधि में पूर्ण किया गया। प्रो. नायर ने बताया कि यह भित्ति चित्र वर्तमान में पेरिस में स्थापित सबसे बड़ा भारतीय चित्रकर्म माना जा रहा है, जो भारतीय कला के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

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इस भित्ति चित्र की फ्रांस में भारत के राजदूत संजीव सिंगला तथा आईसीसीआर की महानिदेशक के. नंदिनी सिंगला ने भी सराहना की है। यह परियोजना कलाकारों, सांस्कृतिक कर्मियों, राजनयिकों एवं कला प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जिससे विदेशों में भारत की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाई मिली है तथा काशी हिंदू विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्राप्त हुआ है।

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