अयोध्या, 7 नवंबर । रामनगरी अयोध्या शनिवार को लाखों दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राम की नगरी में दसवें दीपोत्सव का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर सरयू नदी के 56 घाटों पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जा रहे हैं। पूरी अयोध्या वेदमंत्रों, शंख ध्वनि और जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान रही। दीपोत्सव के लिए रामनगरी को रंगोली, चौक, ध्वजों और तोरणद्वारों से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण त्रेतायुग की स्मृतियों को जीवंत करता नजर आया।
समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, साधु-संत, आचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। रामकथा पार्क में आयोजित मुख्य समारोह में उपराष्ट्रपति ने दीपोत्सव का उद्घाटन किया और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
श्रीराम का जीवन कर्तव्य और प्रजा हित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है : उपराष्ट्रपति
मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रामकथा पार्क में दीपोत्सव समारोह का शुभारंभ करते हुए भगवान श्रीराम का जयघोष किया और देशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अयोध्यावासियों, साधु-संतों और श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि आदर्श जीवन कर्तव्यों के निर्वहन से बनता है।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर प्रजा के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। यही कारण है कि उन्हें भगवान के रूप में पूजा जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हम सभी के लिए आदर्श हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि शताब्दियों के संघर्ष के बाद भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर आज हम सबके सामने है। उन्होंने मंदिर निर्माण में कारसेवकों और साधु-संतों के त्याग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से अयोध्या में दिव्यता और भव्यता का नया स्वरूप दिखाई दे रहा है।
अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की बात कही

उपराष्ट्रपति ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामकथा और रामायण के माध्यम से पूरी दुनिया को संदेश दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय शहर के रूप में विकसित करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय परिवार तक उजाला और सकारात्मक संदेश पहुंचाने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि दीपावली पर भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलकर समाज और राष्ट्र के हित में काम करने का संकल्प लेना चाहिए, ताकि भारत विश्व में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सके।
इससे पहले उपराष्ट्रपति ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भव्य राम दरबार में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और रामभक्त हनुमान के स्वरूपों का तिलक कर स्वागत किया। उन्होंने भगवान श्रीराम का राजतिलक किया और आरती उतारी। इस दौरान उन्होंने उपस्थित साधु-संतों और आचार्यों का भी अभिवादन किया।
राम केवल विचार नहीं, भारत की सांस्कृतिक धारा हैं : राज्यपाल
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आदर्श पुत्र, पिता, पति और शासक के गुणों की सीख देता है। उन्होंने कहा कि राम केवल एक विचार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धारा हैं।
राज्यपाल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि और महाकवि तुलसीदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों से देश-दुनिया को परिचित कराया। अयोध्या की पहचान केवल मंदिरों से नहीं, बल्कि यहां की लोककला, संस्कृति और परंपराओं से भी है।
आज की अयोध्या त्रेतायुग का स्मरण करा रही : योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि आज अयोध्या धाम को देखकर हर किसी को त्रेतायुग की अयोध्या का स्मरण होता है। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाइयों और विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि वनवास के 14 वर्ष पूरे करने के बाद भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और हनुमान के साथ अयोध्या लौटे होंगे, तो दृश्य कुछ ऐसा ही रहा होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या और सप्तपुरियों की महत्ता सभी जानते हैं, लेकिन यह पहचान और आध्यात्मिक शक्ति अपने आप नहीं बनी। उन्होंने कहा, “राम की चेतना ही भारत की चेतना और संस्कार हैं। राम भारत के प्राण हैं, भारत के आत्मसम्मान हैं।” उन्होंने अयोध्या को सप्तपुरियों में प्रथम पुरी की मान्यता मिलने का भी उल्लेख किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या के कण-कण और रोम-रोम में राम विराजमान हैं। उन्होंने इतिहास में भगवान श्रीराम के मंदिर और उनकी आस्था से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं और लंबे संघर्ष के दौर में भी रामभक्तों, संतों, नागाओं, निहंगों और समाज के विभिन्न वर्गों ने अपनी आस्था बनाए रखी। उन्होंने कारसेवकों, संतों और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व नेता अशोक सिंहल के योगदान का उल्लेख करते हुए मंदिर निर्माण के संघर्ष को याद किया।

मुख्यमंत्री योगी ने स्वयं रथ खींचकर किया भगवान के स्वरूपों का स्वागत
दीपोत्सव समारोह से पहले त्रेतायुग की परंपरा का प्रतीकात्मक मंचन किया गया। भगवान श्रीसीताराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान के स्वरूप पुष्पक विमान के प्रतीक हेलिकॉप्टर से रामकथा पार्क के निकट बनाए गए अस्थायी हेलीपैड पर पहुंचे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ भगवान के स्वरूपों की अगवानी की। इसके बाद भगवान श्रीसीताराम के स्वरूप रथ पर सवार होकर रामकथा पार्क पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों के साथ स्वयं रथ खींचकर उनका स्वागत किया। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं को त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृतियों से जोड़ दिया।

सरयू घाट पर आरती और दीप प्रज्ज्वलन का भव्य आयोजन
मुख्य समारोह के बाद उपराष्ट्रपति और अन्य अतिथि सरयू घाट पहुंचे, जहां आरती का आयोजन हुआ। दीपोत्सव के दौरान 56 घाटों पर लाखों दीप प्रज्ज्वलित किए गए। आयोजन में 18 लाख दीपों के प्रज्ज्वलन से बने विश्व रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया।
पूरे आयोजन में प्रदेश के कई मंत्री, प्रमुख संत, धर्माचार्य और गणमान्य अतिथि शामिल हुए। दीपों की रोशनी, वेदमंत्रों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच अयोध्या में दसवें दीपोत्सव का आयोजन श्रद्धा, संस्कृति और परंपरा के उत्सव के रूप में संपन्न हुआ।






