—एसआईआर पर विपक्ष के आरोपों को बताया भ्रामक, बोले- कांग्रेस के शासनकाल में भी 10 बार हो चुकी है यह प्रक्रिया
वाराणसी, 02 नवंबर । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में उन्होंने कांग्रेस के वोट चोरी के दावों को भ्रामक बताते हुए सवाल किया कि जब कांग्रेस के शासनकाल में एसआईआर कराया गया तो वह सही था, लेकिन अब भाजपा सरकार के समय मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया गलत कैसे हो गई?
अब तक 12 बार हो चुकी है एसआईआर की प्रक्रिया
वाराणसी के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पात्रा ने कहा कि यह 12वां एसआईआर है। समय-समय पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया होती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में 10 बार एसआईआर हुआ, जबकि भाजपा सरकार के समय दो बार यह प्रक्रिया पूरी की गई है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी इस प्रक्रिया को पूरी तरह वैध ठहराया है। पात्रा के मुताबिक, उच्चतम न्यायालय में चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे से स्पष्ट हो चुका है कि एसआईआर कराने का निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण सर्वसम्मति से लिया गया था।
पश्चिम बंगाल के चुनावी आंकड़ों का दिया हवाला
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भाजपा प्रवक्ता ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्य की जिन 20 विधानसभा सीटों पर सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से अधिकांश पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा केवल पांच सीटें जीत सकी।
पात्रा के अनुसार, ये आंकड़े एसआईआर की प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात किए जाने के आरोपों को गलत साबित करते हैं।
विपक्ष के बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका पर उठाए सवाल
संबित पात्रा ने विपक्षी दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास 20 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट होने के बावजूद वे मतदाता सूची के सत्यापन में अपनी जिम्मेदारी का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर सके।
राहुल गांधी के बयान पर भी किया पलटवार
राहुल गांधी के वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव को अवैध बताए जाने संबंधी बयान पर पात्रा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को पदभार संभाला था। इससे पहले ही कांग्रेस वर्ष 2014 से 2025 के बीच कई राज्यों के विधानसभा चुनाव हार चुकी है।






