पटना में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागा छात्र, हिरासत में बंद थे करीब 10 प्रदर्शनकारी

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––जेपी गोलंबर पर हिरासत में रखे गए छात्रों के बीच हुई घटना, एसआईआर रद्द करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाला गया था मार्च

पटना। बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को छात्र संगठन आइसा के प्रदर्शन के दौरान उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब पुलिस की हिरासत में रखे गए छात्रों के बीच से एक प्रदर्शनकारी कथित तौर पर पुलिस की गाड़ी की चाबी निकालकर फरार हो गया। घटना जेपी गोलंबर के पास हुई। उस समय गाड़ी में करीब 10 छात्रों को हिरासत में रखा गया था। चाबी निकलने के बाद पुलिस की गाड़ी वहीं खड़ी रह गई।

गाड़ी का गेट खोलकर निकाली चाबी

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों को दो गाड़ियों में बैठाकर हिरासत में रखा था। इनमें से एक गाड़ी का नंबर BR06GG1045 बताया गया है। इसी गाड़ी में मौजूद छात्रों के बीच से एक प्रदर्शनकारी ने गेट खोलकर चाबी निकाल ली और मौके से भाग निकला। घटना के समय आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे। चाबी निकलने के बाद गाड़ी जेपी गोलंबर के पास ही खड़ी रही।

पुलिस की कार्रवाई पर आइसा ने उठाए सवाल

आइसा के समस्तीपुर जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन घसीटकर गाड़ियों में बैठा दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को गर्मी में गाड़ी के अंदर बंद रखा गया था। ऐसे में प्रदर्शनकारियों का नाराज होना स्वाभाविक है।

उन्होंने सवाल उठाया कि सैकड़ों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में कोई प्रदर्शनकारी पुलिस की गाड़ी की चाबी निकालकर कैसे भाग गया। उन्होंने इसके लिए पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया, न कि छात्रों को।

गांधी मैदान से निकाला गया था प्रदर्शन मार्च

दरअसल, आइसा बिहार की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने की मांग को लेकर गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से प्रदर्शन मार्च निकाला गया था। मार्च में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए थे। भाकपा-माले विधायक संदीप सौरव आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे।

प्रदर्शनकारी जब जेपी गोलंबर से आगे बढ़ने लगे, तो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। विधायक संदीप सौरव को भी हल्की चोट लगने की बात सामने आई। इसके बाद उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई।

संदीप सौरव बोले—लोक भवन जाकर ही रहेंगे

विधायक संदीप सौरव ने कहा कि उन्हें चोट लगना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन उनके अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव में धांधली हुई है और इसके लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है, लेकिन पुलिस छात्रों को प्रदर्शन तक नहीं करने दे रही है। पुलिस जबरन छात्रों को हिरासत में ले रही है और उनके साथ अत्याचारियों जैसा व्यवहार कर रही है। लेकिन वह मानेंगे नहीं और लोक भवन जाकर ही रहेंगे।”

एसआईआर रद्द करने और जवाबदेही तय करने की मांग

आइसा की प्रमुख मांगों में एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करना, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनाव प्रक्रिया में कथित धांधली की जवाबदेही तय करना शामिल है। संगठन का आरोप है कि एसआईआर के जरिए मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर छात्र सड़क पर उतरे थे।

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