पटना में वामपंथी और जनसंगठनों का बड़ा प्रदर्शन, 21 सूत्री मांगों को लेकर गांधी मैदान से लोकभवन मार्च; बैरिकेडिंग पर पुलिस से खींचतान

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पटना, 28 सितंबर । बिहार की विभिन्न समस्याओं और जन मुद्दों को लेकर वामपंथी दलों एवं जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को पटना में प्रदर्शन किया। सीपीआई, बीकेएमयू, एआईटीयूसी, एआईवाईएफ, अखिल भारतीय किसान सभा, बिहार महिला समाज और खेत मजदूर यूनियन समेत विभिन्न संगठनों के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने गांधी मैदान से लोकभवन की ओर मार्च निकाला।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार के समक्ष 21 सूत्री मांगें रखीं। इनमें मुख्यमंत्री के इस्तीफे, गरीबों और भूमिहीनों को आवास के लिए जमीन, रोजगार, किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और महंगाई से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।

लोकभवन मार्ग पर बैरिकेडिंग को लेकर खींचतान

गांधी मैदान में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। इसके बाद जब प्रदर्शनकारी लोकभवन की ओर बढ़े तो प्रशासन की ओर से लगाए गए बैरिकेडिंग पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान हुई।

प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कुछ देर के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ते रहे।

मुख्यमंत्री के इस्तीफे और भूमिहीनों को जमीन की मांग

रैली के संयोजक एवं बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन के महासचिव जानकी पासवान ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का मुद्दा शामिल है।

उन्होंने कहा कि पहले से बसे गरीब परिवारों को उजाड़ने की कार्रवाई बंद होनी चाहिए। भूमिहीन गरीबों को घर बनाने के लिए 10 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की मांग भी उन्होंने उठाई।

जानकी पासवान ने रोजगार गारंटी योजना को लेकर भी सरकार से सवाल किया और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की मांग की।

मनरेगा और मजदूरों के लिए रोजगार का मुद्दा

प्रदर्शनकारियों ने रोजगार गारंटी योजना को बहाल करने और मनरेगा को पुराने स्वरूप में लागू करने की मांग की। उन्होंने मजदूरों के लिए पर्याप्त रोजगार और न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने की भी मांग रखी।

वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और मजदूरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

खाद की उपलब्धता और किसानों को मुआवजे की मांग

प्रदर्शन में किसानों के मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने, खाद की कथित कालाबाजारी पर रोक लगाने और फसल नुकसान की स्थिति में उचित मुआवजा देने की मांग की।

अखिल भारतीय किसान सभा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने किसानों की जमीन से जुड़े सवाल भी उठाए। प्रदर्शन के दौरान किसानों की जमीन पर कब्जे के विरोध में नारे लिखे बैनर दिखाई दिए। कार्यकर्ताओं ने किसानों के हितों की रक्षा और जमीन से जुड़े विवादों के समाधान की मांग की।

पेपर लीक रोकने और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग

प्रदर्शन में शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की।

विश्वविद्यालयों में कथित अनियमितताओं को दूर करने की भी मांग उठाई गई। ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की। 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े सवाल को भी मांगों में शामिल किया गया।

महंगाई और जन समस्याओं पर सरकार से कार्रवाई की मांग

प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई और कथित अत्याचार के मुद्दे पर भी सरकार से कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि बढ़ते आर्थिक दबाव से आम लोगों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

मार्च में महिलाओं, युवाओं, पुरुषों और बुजुर्गों समेत विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। कार्यकर्ता अपने-अपने संगठनों के झंडे और बैनर लेकर मार्च में पहुंचे।

‘बदलाव जरूरी है’ के लगाए नारे

गांधी मैदान से लोकभवन की ओर बढ़ते समय प्रदर्शनकारियों ने “बदलाव जरूरी है” और “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। लोकभवन की ओर जाने वाले मार्ग पर प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की व्यवस्था की थी।

बैरिकेडिंग तोड़ने के प्रयास के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ देर खींचतान हुई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया।

विभिन्न वामपंथी दलों और जनसंगठनों की सामूहिक भागीदारी से मार्च में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। प्रदर्शनकारियों ने 21 सूत्री मांगों को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग दोहराई और कहा कि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं होने पर आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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