भागलपुर, 07 सितंबर। जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ की स्थिति विकराल होती जा रही है। नदी किनारे बसे दियारा इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से हजारों लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। अपने ही घर में बेगाने हो चुके लोग भारी मन से आशियाना छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
कई गांव पूरी तरह जलमग्न
नाथनगर प्रखंड के रतीपुर, बैरिया शंकरपुर, अजमेरीपुर, रसीदपुर और श्रीरामपुर समेत कई गांव बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। जिन गलियों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब पानी का सन्नाटा पसरा है।
गांवों में पानी घुसने के बाद बेघर हुए कई परिवारों ने रविंद्र भवन और टिल्हा कोठी जैसे ऊंचे सरकारी भवनों में शरण ली है। हालांकि विस्थापित परिवारों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। उनके सामने रहने की जगह के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल, भोजन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का संकट खड़ा हो गया है।
सड़क किनारे तिरपाल के नीचे कट रही जिंदगी
कई परिवारों को सरकारी भवनों के भीतर जगह नहीं मिल सकी है। ऐसे परिवार सड़क किनारे या खुले मैदानों में तिरपाल लगाकर अस्थायी आशियाना बनाने को मजबूर हैं। इन अस्थायी ठिकानों में छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ परिवार किसी तरह दिन काट रहे हैं।
बाढ़ की मार केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। पालतू और मवेशियों के लिए भी संकट गहरा गया है। ग्रामीण किसी तरह अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों तक लेकर आए हैं, लेकिन अब उनके सामने चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मवेशियों के लिए चारे का संकट
बाढ़ के पानी में चारागाह डूब जाने से मवेशियों के लिए हरा चारा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को अपने परिवार के साथ-साथ पशुओं के भोजन और सुरक्षा की भी चिंता सता रही है। लोगों का कहना है कि घर-गृहस्थी का सामान छोड़कर वे किसी तरह जान बचाकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचे हैं, लेकिन यहां भी उनकी परेशानी कम नहीं हुई है।
बाढ़ पीड़ित बोले- गंगा मइया ने सब कुछ छीन लिया
एक बाढ़ पीड़ित ने भावुक होकर कहा, “गंगा मइया ने हमारा सब कुछ छीन लिया। घर डूब गया, अनाज बह गया। अब बच्चों को क्या खिलाएं और खुद कहां जाएं, कुछ समझ नहीं आ रहा।”
बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है। कई परिवारों का अनाज और घरेलू सामान पानी में डूब गया है।

राहत नहीं मिलने का स्थानीय लोगों का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि भीषण बाढ़ के बावजूद उन्हें अब तक पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिल सकी है। प्रभावित परिवारों ने सूखा राशन, पेयजल, दवा और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि राहत सामग्री और सामुदायिक रसोई जैसी सुविधाएं सभी प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे परेशानी और बढ़ गई है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
गंगा का पानी लगातार नए इलाकों को अपनी चपेट में ले रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन के सामने प्रभावित आबादी तक तत्काल राहत पहुंचाने की बड़ी चुनौती है। बाढ़ पीड़ितों के लिए सूखा राशन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा, शौचालय और पशु चारे की व्यवस्था करना इस समय सबसे बड़ी जरूरत है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की नजर अब प्रशासन की राहत व्यवस्था पर टिकी है। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द पर्याप्त सहायता मिलेगी और उनकी मुश्किलें कुछ कम होंगी।






