सीबीजी की संशोधित कीमत से सीएनजी-पीएनजी उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा बड़ा बोझ, केंद्र ने 43% मूल्य वृद्धि की आशंकाओं को किया खारिज

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नई दिल्ली, 29 अगस्त। केंद्र सरकार ने उन आशंकाओं को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि गोबरधन योजना के तहत संपीड़ित जैव गैस (सीबीजी) की संशोधित खरीद कीमत से सीएनजी और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) उपभोक्ताओं पर बड़ा अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य सीबीजी उत्पादकों को स्थिर कीमत उपलब्ध कराना है, जबकि उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा।

सीबीजी उत्पादकों को मिलेगा स्थिर मूल्य

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि संशोधित सीबीजी मूल्य निर्धारण नीति हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ उत्पादकों को वित्तीय स्थिरता और प्रोत्साहन देने पर केंद्रित है। मंत्रालय के अनुसार, आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई सीधा या भारी बोझ नहीं पड़ेगा।

मौजूदा व्यवस्था में सीबीजी उत्पादकों को मिलने वाला भुगतान सीएनजी के खुदरा बिक्री मूल्य के 85 प्रतिशत से जुड़ा है। इसके तहत कीमत लगभग 1,478 रुपये प्रति एमएमबीटीयू बैठती है। नई व्यवस्था में सीबीजी की खरीद कीमत 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू तय की गई है, जो मौजूदा कीमत से करीब 43 प्रतिशत अधिक है।

सरकार देगी 10 रुपये प्रति किलो की सहायता

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू उत्पादकों को दी जाने वाली खरीद कीमत है और यही राशि सीधे सीएनजी या घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं से नहीं वसूली जाएगी।

सीबीजी को बढ़ावा देने के लिए सरकार 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से वहनीयता सहायता भी देगी। मंत्रालय के अनुसार, पांच प्रतिशत मीथेन वाले सीबीजी के लिए यह सहायता करीब 215 रुपये प्रति एमएमबीटीयू के बराबर होगी। इस राशि का वहन सरकार करेगी।

प्रभावी लागत में करीब 28 फीसदी की बढ़ोतरी

सरकारी सहायता को समायोजित करने के बाद गैस उपभोक्ताओं के माध्यम से वसूली जाने वाली प्रभावी सीबीजी लागत करीब 1,895 रुपये प्रति एमएमबीटीयू होगी। यह मौजूदा 1,478 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत अधिक है।

मंत्रालय ने कहा कि इसलिए वास्तविक लागत वृद्धि 43 प्रतिशत की खरीद मूल्य वृद्धि से काफी कम होगी।

बड़े गैस पूल में बांटी जाएगी लागत

सरकार के मुताबिक सीबीजी को उसकी खरीद कीमत पर सीधे सिटी गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियों को नहीं बेचा जाता। इसे अन्य घरेलू प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर साझा गैस पूल में शामिल किया जाता है और इसकी लागत पूरे घरेलू गैस पूल में वितरित होती है।

पुरानी व्यवस्था में सीबीजी की लागत प्रशासित मूल्य तंत्र (एपीएम) के तहत आवंटित सीमित गैस मात्रा पर वितरित होती थी। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से परिवहन क्षेत्र के सीएनजी और घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए होता था।

नई व्यवस्था में सीबीजी की शुद्ध लागत कहीं बड़े घरेलू गैस आधार पर वितरित होगी, जो पहले की तुलना में करीब 2.5 से 3 गुना बड़ा है। इससे प्रति उपभोक्ता लागत का प्रभाव काफी कम होने की उम्मीद है।

जैविक कचरे के उपयोग को मिलेगा बढ़ावा

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि संशोधित मूल्य व्यवस्था का उद्देश्य सीबीजी उत्पादन को प्रोत्साहित करना, जैविक अपशिष्ट के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना और देश में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाना है।

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