धनबाद, 25 अगस्त। डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख जयराम महतो एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के साथ कथित गाली-गलौज और धमकी भरे व्हाट्सएप कॉल का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले में नई धाराएं जोड़ दी हैं। घटना को लेकर पुलिस महकमे में भी नाराजगी है।
गणेश दास की गिरफ्तारी को लेकर हुआ विवाद
थाना प्रभारी की शिकायत के मुताबिक, 22 अगस्त की रात करीब 8:09 बजे जयराम महतो ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल किया था। आरोप है कि विधायक अपने समर्थक गणेश दास की गिरफ्तारी से नाराज थे।
शिकायत में कहा गया है कि बातचीत के दौरान कथित तौर पर थाना प्रभारी के साथ गाली-गलौज की गई और धमकी दी गई। आरोप है कि विधायक ने वर्दी उतरवाने और सरकार बदलने के बाद देख लेने जैसी बातें कहीं। वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिसकर्मियों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग
घटना के बाद धनबाद के पुलिसकर्मियों में नाराजगी की बात सामने आई है। पुलिस मेंस एसोसिएशन ने थाना प्रभारी के समर्थन में कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी प्रमाण पत्र से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद बड़ापिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के कथित फर्जी पैड, मुहर और हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र जारी करने के मामले से शुरू हुआ। इसी मामले में पुलिस ने JLKM नेता गणेश दास को हिरासत में लिया था।
गणेश दास की हिरासत के विरोध में बरवाअड्डा थाने पहुंचे विधायक समर्थकों और पुलिस के बीच विवाद होने की बात सामने आई थी। इसके बाद मामला और तूल पकड़ गया।
दोनों पक्षों ने दर्ज कराई प्राथमिकी
मामले में दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। थाना प्रभारी की शिकायत पर जयराम महतो समेत कई नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
वहीं, मुखिया के बेटे प्रदीप कुमार रजक ने भी विधायक के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
जयराम महतो ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश
दूसरी ओर, जयराम महतो ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि वह हिरासत में लिए गए गणेश दास के मामले की जानकारी लेने थाने पहुंचे थे। विधायक ने आरोप लगाया कि वहां उनके साथ मारपीट की गई और उनका सामान भी छीन लिया गया।
जयराम महतो ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए थाने के सीसीटीवी फुटेज और मीडिया में उपलब्ध वीडियो फुटेज की जांच कराने की मांग की है। मामले में दोनों पक्षों के आरोपों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।






