भागलपुर, 10 अगस्त : श्रावणी मेले के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रही आस्था की राह पर हर दिन श्रद्धा के अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल के कोलकाता से आई करीब 50 से 60 श्रद्धालुओं की टोली इन दिनों कांवड़ियों और स्थानीय लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। टोली की सबसे बड़ी खासियत करीब 150 किलोग्राम वजनी भव्य ‘महाकाल कांवड़’ है।
महाकाल के स्वरूप में सजी कांवड़
करीब 150 किलो की इस विशाल कांवड़ को महाकाल भोलेनाथ के स्वरूप में सजाया गया है। इसमें विभिन्न धार्मिक प्रतीकों और आकर्षक सजावट का इस्तेमाल किया गया है। भारी-भरकम कांवड़ को टोली के श्रद्धालु बारी-बारी से अपने कंधों पर उठाकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं।
कांवड़ देखने उमड़ रही भीड़
कच्ची कांवड़िया पथ पर जब कोलकाता की यह टोली पहुंचती है तो अनोखी कांवड़ को देखने के लिए श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ जुट जाती है। करीब 60 श्रद्धालु आपसी तालमेल के साथ बारी-बारी से कांवड़ को संभाल रहे हैं।
पूरे रास्ते ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से माहौल शिवमय बना हुआ है। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है।
महाकाल के प्रति आस्था का प्रतीक
टोली में शामिल श्रद्धालुओं का कहना है कि यह सिर्फ एक कांवड़ नहीं, बल्कि उज्जैन के महाकाल के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। उनका उद्देश्य इस विशेष कांवड़ को लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचना है।
श्रावणी मेले में इस तरह की अनोखी और कठिन कांवड़ यात्राएं श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। साथ ही, यह धार्मिक आस्था और भक्ति के प्रति लोगों के समर्पण को भी दर्शाती हैं।






