वाशिंगटन, 31 जुलाई — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि गाजा पट्टी में सक्रिय हमास और अन्य सशस्त्र समूह हथियार छोड़ने पर सहमत हो गए हैं। उनके अनुसार, यह समझौता ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के माध्यम से हुआ है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा स्थापित करना है।
निरस्त्रीकरण की दिशा में बड़ा कदम
ट्रंप ने इसे “ऐतिहासिक समझौता” बताते हुए कहा कि इससे गाजा पट्टी को पूरी तरह सैन्य-मुक्त करने का रास्ता साफ होगा। समझौते के तहत जैसे-जैसे निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, इजराइली सेना भी चरणबद्ध तरीके से इलाके से हटेगी।
6–8 महीनों में हथियार सौंपने की शर्त
समझौते के मुताबिक, हमास को छह से आठ महीनों के भीतर अपने सभी भारी और हल्के हथियार हटाने होंगे। साथ ही उसे सुरंग नेटवर्क, हथियार निर्माण इकाइयों और भंडारण स्थलों के नक्शे भी सौंपने होंगे। इन हथियारों को एक प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय समिति’ के नियंत्रण में रखा जाएगा।
नई प्रशासनिक व्यवस्था की तैयारी
ट्रंप ने बताया कि गाजा में एक नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की जाएगी। इसके तहत एक नई पुलिस फोर्स का गठन होगा, जिसे इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट की मंजूरी के बाद प्रशिक्षित किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल भी इस प्रक्रिया में सहयोग करेगा।
मध्यस्थ देशों की अहम भूमिका
इस समझौते तक पहुंचने में मिस्र, कतर और तुर्किये ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों ने हमास पर समझौते के लिए काफी दबाव डाला। मिस्र के खुफिया प्रमुख हसन रशाद और हमास नेता खलील अल-हय्या के बीच करीबी संबंध भी वार्ता में सहायक रहे।
इजराइल की शंकाएं बरकरार
हालांकि, इजराइली अधिकारियों और कुछ पश्चिमी राजनयिकों ने इस समझौते को लेकर संदेह जताया है। उनका मानना है कि यह देखना बाकी है कि हमास अपने वादों का पालन करेगा या नहीं। इजराइल ने कतर और तुर्किये पर हमास की राजनीतिक भूमिका बनाए रखने का आरोप भी लगाया है।
हमास लड़ाकों को मिल सकती है माफी
समझौते की एक अहम शर्त यह भी है कि हमास के लड़ाकों को आम माफी दी जा सकती है और उन्हें गाजा में रहने की अनुमति होगी। साथ ही, हमास विरोधी मिलिशिया गुटों से भी हथियार वापस लिए जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और प्रतिक्रिया
इस समझौते को ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है। वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उसने हमास को जल्दबाजी में समझौता न करने की सलाह दी थी।
ट्रंप का बयान
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, “यह समझौता स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। गाजा अब आतंकवादी गतिविधियों का केंद्र नहीं रहेगा और एक नई फिलिस्तीनी सरकार के तहत आगे बढ़ेगा।”
इस समझौते के सफल क्रियान्वयन से मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि इसके परिणाम पूरी तरह समझौते के पालन पर निर्भर करेंगे।






