बिहार के सरकारी स्कूलों की हालत पर सदन में बहस, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छह महीने में सुधार का दिया भरोसा

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पटना, 22 जुलाई । बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति का मुद्दा सदन में जोरदार ढंग से उठा। विपक्ष ने जर्जर स्कूल भवनों, कमरों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरोसा दिलाया कि जिन पंचायतों में हाई स्कूलों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां छह महीने के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

राजद विधायक ने उठाया जर्जर स्कूलों का मुद्दा

प्रश्नकाल के दौरान राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि बिहार के लगभग 40 प्रतिशत सरकारी विद्यालय जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं या उनके भवन पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि कई स्कूलों को दूसरे गांवों में स्थानांतरित कर चलाया जा रहा है, जबकि अनेक स्थानों पर छात्र-छात्राएं पेड़ों के नीचे या अपर्याप्त कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

राज्यव्यापी सर्वे और नए भवनों की मांग

कुमार सर्वजीत ने सरकार से पूछा कि क्या शिक्षा विभाग ने पूरे राज्य में विद्यालय भवनों की स्थिति का व्यापक सर्वे कराया है और यह पता लगाया है कि किन पंचायतों में स्कूल भवन पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।

उन्होंने मांग की कि जर्जर विद्यालयों का राज्यव्यापी सर्वे कराकर नए भवनों का निर्माण शीघ्र कराया जाए। उनका कहना था कि कई गांवों में पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद नए स्कूल भवन नहीं बनाए गए हैं।

शिक्षा की गुणवत्ता पर भी उठाए सवाल

राजद विधायक ने शिक्षा की गुणवत्ता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तीसरी से छठी कक्षा तक के कई छात्र बुनियादी अंग्रेजी और सामान्य विषयों का अपेक्षित ज्ञान नहीं रखते।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षकों की संख्या बढ़ाने का दावा करती है, लेकिन विद्यालयों का आधारभूत ढांचा बेहद कमजोर है। कई स्कूलों में केवल दो कमरों में करीब एक हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई कराई जा रही है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के लिए बिहार विधानसभा के सभी सदस्यों की विशेष बैठक बुलाने की भी मांग की।

मुख्यमंत्री ने दिया छह महीने का आश्वासन

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की प्रत्येक पंचायत में हाई स्कूल स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था।

उन्होंने बताया कि उस समय लगभग 600 से 700 पंचायतों में विद्यालय निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं थी। ऐसे क्षेत्रों में छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए जहां दो कमरे उपलब्ध थे, वहीं से विद्यालयों का संचालन शुरू किया गया। बाद में इन विद्यालयों में क्रमशः दसवीं और इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई भी शुरू कराई गई।

भूमि उपलब्ध होते ही शुरू होगा निर्माण

मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि विद्यालय भवनों और आधारभूत सुविधाओं को लेकर उठाई गई चिंताएं गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले की समीक्षा करेगी और जिन पंचायतों में हाई स्कूल निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां छह महीने के भीतर जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसके बाद नए विद्यालय भवनों के निर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

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