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जमशेदपुर की शांभवी तिवारी ने रचा इतिहास, ISC में 100% अंक के साथ बनीं नेशनल टॉपर

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पूर्वी सिंहभूम, 30 अप्रैलशहर के शैक्षणिक इतिहास में गुरुवार को एक नया अध्याय जुड़ गया, जब सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल की मेधावी छात्रा शांभवी तिवारी ने काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) की 12वीं (ISC) बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक हासिल कर देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया।

जश्न का माहौल
परिणाम घोषित होते ही शांभवी के घर और स्कूल में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों, शिक्षकों और मित्रों ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया। स्कूल प्रबंधन ने इसे संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि यह सफलता अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बनेगी।

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डॉक्टर बनने का लक्ष्य, नीट की तैयारी
शांभवी का लक्ष्य डॉक्टर बनना है और इसी दिशा में वह 3 मई को होने वाली NEET परीक्षा में शामिल होंगी। उनका परीक्षा केंद्र अब्दुल बारी कॉलेज निर्धारित किया गया है। उन्होंने बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ नीट की तैयारी भी गंभीरता से की और नियमित मॉक टेस्ट देकर खुद को तैयार किया।

परिवार का मिला सहयोग
उनकी सफलता के पीछे परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके पिता राकेश रमन ऑल इंडिया रेडियो में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव हैं, जबकि उनकी माता निभा सिन्हा सेंट मैरी इंग्लिश हाई स्कूल में पीजीटी केमिस्ट्री शिक्षिका हैं। घर में शिक्षा का माहौल होने से उन्हें पढ़ाई के लिए लगातार प्रेरणा मिलती रही।

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अनुशासन और मेहनत बनी सफलता की कुंजी
राकेश रमन के अनुसार, शांभवी बचपन से ही अनुशासित और आत्मनिर्भर रही हैं। उन्होंने कभी पढ़ाई के लिए दबाव नहीं डाला, बल्कि शांभवी खुद अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीर रहीं। वह प्रतिदिन लगभग 9 घंटे पढ़ाई करती थीं। स्कूल से लौटने के बाद नियमित अध्ययन और छुट्टी के दिनों में सुबह से पढ़ाई उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

सेल्फ स्टडी और फोकस का महत्व
शांभवी ने अपनी तैयारी में सेल्फ स्टडी को प्राथमिकता दी और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा। उनका मानना है कि हर छात्र को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय का चयन करना चाहिए और उसी दिशा में ईमानदारी से मेहनत करनी चाहिए।

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सफलता का श्रेय और संदेश
अपनी इस उपलब्धि पर शांभवी ने इसका श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और स्कूल के सहयोगी माहौल को दिया। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

झारखंड के लिए गर्व का क्षण
शांभवी की यह सफलता न केवल उनके परिवार और विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय बन गई है।

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