चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन, पटना में कार्यकर्ताओं पर चला वाटर कैनन; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग

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पटना, 25 सितंबर। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने शुक्रवार को पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में विरोध मार्च निकाला। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

विधानसभा के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोका गया

पटना में कांग्रेस कार्यकर्ता आर. ब्लॉक और चाणक्य होटल होते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर बढ़े। विधानसभा के पास प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी।

प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने का प्रयास किया। इसके बाद प्रशासन की ओर से वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं के हाथों में बैनर और पोस्टर थे, जिन पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारे लिखे थे।

कांग्रेस ने इससे पहले भी SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है।

SIR और मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस का विरोध

कांग्रेस का प्रदर्शन विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन जैसे मामलों से संबंधित थीं।

चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद के दावे को खारिज किया

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि रिपोर्ट में जिन टिप्पणियों और नोट्स का उल्लेख है, उन्हें निर्णय प्रक्रिया में सुझाव के तौर पर देखा जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि पिछले एक वर्ष के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और SIR समेत प्रमुख फैसलों में तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति थी।

आयोग के अनुसार, निर्णय प्रक्रिया में अलग-अलग सुझाव या राय सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। वहीं, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कई मामलों में दर्ज की गई औपचारिक आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।

कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध का किया था ऐलान

कांग्रेस ने SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर 25 सितंबर को देशभर में राज्य निर्वाचन आयोगों के कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने का कार्यक्रम घोषित किया था। इसी क्रम में बिहार में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।

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