734 करोड़ के फर्जी GST ITC मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, जमशेदपुर के स्क्रैप कारोबारी पिता-पुत्र गिरफ्तार

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रांची, 01 अक्टूबर । झारखंड में सामने आए 734 करोड़ रुपये के कथित फर्जी जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) मामले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने जमशेदपुर, कोलकाता और देवघर में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की।

जमशेदपुर में कार्रवाई के दौरान ईडी ने स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उनके पुत्र राज जायसवाल को देर रात गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को मेडिकल जांच के लिए एमजीएम अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल जांच पूरी होने के बाद ईडी की टीम पिता-पुत्र को अपने साथ रांची ले गई।

बिष्टुपुर में तीन ठिकानों पर तलाशी

ईडी की टीम ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर इलाके में कारोबारी से जुड़े तीन ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। होटल सोनेट के सामने स्थित ज्योति अपार्टमेंट में ज्ञानचंद जायसवाल के आवास-सह-कार्यालय की जांच की गई।

इसके अलावा केएन रोड स्थित बीएस टावर के ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद कारोबारी के फ्लैट और उनके अकाउंटेंट संजय पारेख से जुड़े ठिकाने पर भी दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई।

50 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी रहे मौजूद

तलाशी अभियान के दौरान ईडी के 50 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्रवाई के दौरान सभी संबंधित ठिकानों पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीआरपीएफ जवानों की तैनाती की गई थी।

ईडी की टीम ने कारोबारी गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज, बैंकिंग लेन-देन, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य कागजात खंगाले। अधिकारियों ने इस दौरान संबंधित लोगों से पूछताछ भी की।

कोलकाता के दो ठिकानों पर भी छापेमारी

इसी मामले की जांच के सिलसिले में ईडी ने कोलकाता के दो ठिकानों पर भी कार्रवाई की। एजेंसी कथित फर्जी कंपनियों, कारोबारियों के नेटवर्क और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है।

जांच का उद्देश्य कथित तौर पर फर्जी बिल और कंपनियों के माध्यम से किए गए लेन-देन तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों की पूरी श्रृंखला का पता लगाना है।

मेडिकल जांच के दौरान पिता-पुत्र ने किया हंगामा

गिरफ्तारी के बाद देर रात मेडिकल जांच के लिए ज्ञानचंद जायसवाल और राज जायसवाल को एमजीएम अस्पताल लाया गया। इस दौरान दोनों ने हंगामा किया और खुद को मामले में फंसाए जाने का आरोप लगाया।

ज्ञानचंद जायसवाल ने अपना ब्लड प्रेशर बढ़ा होने की बात कही और दवा नहीं मिलने की शिकायत भी की। मेडिकल जांच पूरी होने के बाद ईडी की टीम दोनों को अपने साथ रांची ले गई।

37 शेल कंपनियों का नेटवर्क जांच के घेरे में

ईडी की जांच के अनुसार, पूरे कथित नेटवर्क में 37 शेल कंपनियां बनाई गईं और इनके माध्यम से करीब 5,000 करोड़ रुपये के फर्जी चालान जारी किए गए।

जांच में आरोप है कि वास्तविक माल की आपूर्ति के बिना करीब 734 करोड़ रुपये के आईटीसी का दावा किया गया। इसी कथित फर्जीवाड़े और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच अब ईडी कर रही है।

GST इंटेलिजेंस की जांच के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग केस

बताया गया है कि मामले की शुरुआती जांच जीएसटी इंटेलिजेंस की ओर से की गई थी। इसी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ईडी ने कथित धनशोधन से जुड़े मामले में कार्रवाई शुरू की।

एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी आईटीसी के जरिए हासिल रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या रही।

कई लोगों की भूमिका की जांच

एजेंसी के अनुसार, कथित रैकेट में अमित उर्फ निक्की भालेरिया, कोलकाता के शिवकुमार देवड़ा उर्फ मोदित देवड़ा और अमित गुप्ता समेत अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

ईडी गिरफ्तार पिता-पुत्र से पूछताछ के जरिए कथित कंपनियों के नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और अन्य संबंधित लोगों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है।

सीए के कार्यालय से अहम दस्तावेज जब्त

जमशेदपुर के बीएस टावर स्थित सीए संजय पारेख के कार्यालय से भी जांच एजेंसी ने कई दस्तावेज जब्त किए हैं। इनमें ऑडिट पेपर, जीएसटी फाइलिंग लॉग और बैलेंस शीट शामिल बताए गए हैं।

इन दस्तावेजों की जांच के जरिए एजेंसी कथित फर्जी कंपनियों और उनके बीच हुए वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

पिता-पुत्र से पूछताछ के बाद खुल सकते हैं और राज

ज्ञानचंद जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद ईडी की जांच अब आगे बढ़ने की संभावना है। एजेंसी दोनों से पूछताछ कर कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क में उनकी भूमिका, कंपनियों के संचालन, वित्तीय लेन-देन और अन्य संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

734 करोड़ रुपये के कथित फर्जी आईटीसी और करीब 5,000 करोड़ रुपये के फर्जी चालान से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

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