11 अरब साल पुराने कॉमेट 3I/ATLAS का एलियन कनेक्शन नहीं, वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च में किया खुलासा

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हैदराबाद। अंतरिक्ष से हमारे सौर मंडल में आए रहस्यमयी इंटरस्टेलर कॉमेट 3I/ATLAS (C/2025 N1) को लेकर फैली एलियन स्पेसशिप की अटकलों पर नई वैज्ञानिक स्टडी ने विराम लगा दिया है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इस खगोलीय पिंड से किसी भी प्रकार के एलियन या कृत्रिम तकनीकी संकेतों का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

यह कॉमेट पिछले वर्ष वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ था। 2017 में ओउमुआमुआ और 2019 में बोरिसोव के बाद यह हमारे सौर मंडल में प्रवेश करने वाला तीसरा ज्ञात इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट था।

क्या होता है इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट?

इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट ऐसे खगोलीय पिंड होते हैं जो किसी एक तारे के गुरुत्वाकर्षण से बंधे नहीं होते। ये गहरे अंतरिक्ष में यात्रा करते हुए किसी दूसरे तारकीय तंत्र में प्रवेश कर सकते हैं। 3I/ATLAS भी इसी श्रेणी का एक दुर्लभ पिंड है, जो बाहरी अंतरिक्ष से हमारे सौर मंडल में आया था।

जुलाई 2025 में हुई थी खोज

इस कॉमेट को पहली बार 1 जुलाई 2025 को चिली स्थित एटलस टेलीस्कोप ने देखा था। इसके बाद भारतीय खगोलविदों ने भी 3 जुलाई को लद्दाख के हानले स्थित हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप से इसकी तस्वीरें दर्ज की थीं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कॉमेट लगभग 440 मीटर चौड़ा और करीब 5.5 किलोमीटर लंबा था। अक्टूबर 2025 में यह मंगल ग्रह के पास से गुजरा, लेकिन पृथ्वी के लिए इससे किसी प्रकार का खतरा नहीं था।

वर्तमान में यह पृथ्वी से 1.3 अरब किलोमीटर से अधिक दूर जा चुका है और दोबारा इंटरस्टेलर स्पेस की ओर बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इसकी आयु लगभग 11 अरब वर्ष हो सकती है, जो सूर्य की उम्र से भी कहीं अधिक है।

एलियन स्पेसशिप की अफवाहें कैसे फैलीं?

कॉमेट की असामान्य उत्पत्ति और आकार को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई गईं। कुछ लोगों ने इसे एलियन सभ्यता द्वारा भेजा गया अंतरिक्ष यान तक बता दिया।

इन दावों की जांच के लिए वैज्ञानिकों ने विस्तृत अध्ययन शुरू किया। अमेरिकी संगठन SETI Institute के शोधकर्ताओं ने जुलाई 2025 में कई घंटों तक रेडियो सिग्नलों की निगरानी की।

स्टडी में क्या मिला?

जांच के दौरान वैज्ञानिकों को लगभग 7.4 करोड़ नैरो-बैंड रेडियो सिग्नल प्राप्त हुए। विस्तृत विश्लेषण के बाद मानव गतिविधियों और कॉमेट की गति से जुड़े संकेतों को अलग कर दिया गया।

इसके बाद केवल 200 से कुछ अधिक सिग्नल बचे, जिनका संबंध भी पृथ्वी की तकनीक, उपग्रहों या अन्य ज्ञात स्रोतों से पाया गया। शोधकर्ताओं को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जो किसी बाहरी सभ्यता या कृत्रिम स्रोत की ओर इशारा करता हो।

यह अध्ययन The Astronomical Journal में प्रकाशित किया गया है।

वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

फर्मन यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता Valeria Garcia Lopez ने कहा कि यह अध्ययन दर्शाता है कि वर्तमान तकनीक के बावजूद संभावित टेक्नोसिग्नेचर (तकनीकी संकेतों) की पहचान करना कितना चुनौतीपूर्ण कार्य है।

वहीं Sofia Sheikh और उनकी टीम ने कहा कि भविष्य में मानव निर्मित अंतरिक्ष यान भी इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट बन सकते हैं। उदाहरण के तौर पर Voyager 1 और Voyager 2 एक दिन किसी अन्य तारकीय प्रणाली की दिशा में बढ़ते हुए ऐसे ही इंटरस्टेलर तकनीकी पिंड माने जा सकते हैं।

वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ 3I/ATLAS

हालांकि 3I/ATLAS अब सौर मंडल से दूर जा रहा है और इसके दोबारा लौटने की संभावना नहीं है, लेकिन इसने वैज्ञानिकों को इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट्स की प्रकृति, संरचना और व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है।

इस अध्ययन से यह भी स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल 3I/ATLAS एक प्राकृतिक खगोलीय पिंड है और इसके साथ किसी एलियन तकनीक या बाहरी सभ्यता का कोई प्रमाण नहीं जुड़ा है।

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