महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के दिवंगत उप मुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु के बाद अब एनसीपी विधायक दल ने उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को अपना नेता चुन लिया है। सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम के पद पर काबिज़ होने वाली पहली महिला हैं। उन्होंने शाम पांच बजे मुंबई के लोक भवन में शपथ ली। उन्हें राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पद की शपथ दिलाई। अपने पति और पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, सुनेत्रा पवार ने न केवल सत्ता की कमान संभाली है। सूत्रों की मानें तो वित्त एवं योजना विभाग को छोड़कर अजित पवार के पास रहे सभी विभाग सुनेत्रा पवार को सौंपे जाएंगे।अजित पवार के पास वित्त एवं योजना, राज्य उत्पाद शुल्क, खेल एवं अल्पसंख्यक मामलों के विभाग थे। वित्त एवं योजना विभाग को छोड़कर बाकी सभी विभाग सुनेत्रा पवार को दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति का नेतृत्व करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दिवंगत अजित पवार के परिवार और उनकी पार्टी द्वारा लिए गए हर फैसले का समर्थन करेगी।फडणवीस ने नागपुर में मीडिया कहा, ‘राकांपा उपमुख्यमंत्री पद के लिए जो भी फैसला लेगी, सरकार और भाजपा उस फैसले का समर्थन करेंगे। मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि हम अजित दादा के परिवार और राकांपा के साथ खड़े हैं।’
सुनेत्रा पवार 2024 के लोकसभा चुनाव तक सुर्खियों से दूर रहीं. उसी वर्ष हुए आम चुनाव में उन्होंने अपने पति की पार्टी की उम्मीदवार के रूप में बारामती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन प्रतिष्ठा की लड़ाई में अपनी ननद एवं राकांपा (शरदचंद्र पवार) उम्मीदवार सुप्रिया सुले से हार गईं। इसके बाद सुनेत्रा पवार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुईं।
डिप्टी सीएम अजित पवार का 28 जनवरी को विमान हादसे में निधन हो गया था और उनके निधन के बाद ये पद ख़ाली हुआ था। लेकिन सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने के बाद सवाल ये उठ रहे हैं कि शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के साथ अच्छा ख़ासा बहुमत होने के बाद भी बीजेपी ने सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम क्यों बनाया है। 2024 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव बीजेपी ने एनसीपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ मिलकर लड़ा था।
महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 145 सीटों की ज़रूरत होती है। गठबंधन में चुनाव लड़ने के बावजूद बीजेपी अकेले दम पर बहुमत हासिल करने के क़रीब पहुंच गई थी। बीजेपी को 132 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि इसके बावजूद बीजेपी ने 57 सीट वाली शिवसेना और 41 सीट वाली एनसीपी को सरकार का हिस्सा बनाया। हालांकि सीएम का पद बीजेपी ने अपने पास रखा और देवेंद्र फडणवीस ने सत्ता की कमान संभाली। इसके साथ ही शिवसेना के एकनाथ शिंदे और एनसीपी के अजित पवार को डिप्टी सीएम का पद मिला।
राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र साठे का मानना है कि सुनेत्रा पवार को इतनी जल्दी डिप्टी सीएम बनाकर बीजेपी राज्य की राजनीति में कई बिंदुओं को साधने की कोशिश कर रही है। राजेंद्र साठे ने कहा, “बीजेपी बहुमत के क़रीब तो है, लेकिन उनके पास अकेले बहुमत नहीं है। महाराष्ट्र की राजनीति में दो बड़े गुट हैं- एक शिवसेना और दूसरी एनसीपी। शिवसेना की विचारधारा बीजेपी के जैसी है और उनसे उन्हें ख़तरा नहीं है। नगर निगम चुनाव से ये भी पता चल गया है कि शिवसेना की ताक़त मुंबई तक ही सीमित है। शिंदे गुट बीजेपी के कंट्रोल में है।”
“उसके अलावा महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी बड़ी ताक़त है। एनसीपी की ताकत कोऑपरेटिव, शुगर फैक्ट्री और मराठा बहुल इलाक़ों से आती है। वो एनसीपी के साथ बने रहने वाली ताक़त है और सत्ता पर ज़्यादा निर्भर नहीं है। उस ताक़त में सेंधमारी करना बीजेपी का हमेशा से मक़सद रहा है। शरद पवार नाम का जादू अभी भी चलता है। उसी के असर को कम करने के लिए बीजेपी ने पहले अजित पवार को और अब सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाया है।”
महाराष्ट्र की राजनीति में बीते कुछ समय से एनसीपी के दोनों गुटों के एक साथ आने की चर्चा भी हो रही है। अजित पवार के निधन के बाद इन चर्चाओं में तेज़ी देखने को मिली है।





