मातृत्व सुरक्षा में बड़ा बदलाव, अब महीने में तीन बार होगी हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी जांच

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सारण। जिले समेत पूरे बिहार में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को नया विस्तार दिया है। पहले जहां महीने में केवल एक बार जांच होती थी, वहीं अब महीने की 9, 15 और 21 तारीख को विशेष शिविर आयोजित कर गर्भवती महिलाओं की सघन जांच की जा रही है।

इस पहल से हाई- रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान कर हजारों महिलाओं की जान बचाई जा रही है। सदर प्रखंड की प्रियंका ने बताया पहले मैं महीने में एक बार ही जांच कराती थी लेकिन अब तीन बार कैंप लगने से मैंने दूसरी बार जांच कराई। उस दौरान मेरा ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर पर मिला। डॉक्टरों ने तुरंत दवा दी और बड़े अस्पताल रेफर किया। अगर वह जांच नहीं होती तो शायद मेरी जान जोखिम में पड़ जाती।

अभियान को और सुलभ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सेवाओं का विकेंद्रीकरण कर दिया है। जिला अस्पताल और पीएचसी के अलावा अब अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर भी यह सुविधा शुरू कर दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती और उन्हें घर के पास ही विशेषज्ञ परामर्श मिल रहा है।

मशरक की आशा कार्यकर्ता रेखा देवी कहती हैं कि महीने में तीन बार कैंप लगने से एनीमिया और बीपी जैसे खतरों को जल्दी पकड़ना आसान हो गया है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ संजू प्रसाद के अनुसार बार-बार जांच से डॉक्टरों को मरीज की स्थिति पर निरंतर नजर रखने का मौका मिलता है, जिससे गंभीर स्थिति बनने से पहले ही रोकथाम संभव हो जाती है।

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