मसूड़ों की बीमारी से दिमाग पर असर? नई रिसर्च में चौंकाने वाले संकेत

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मसूड़ों की गंभीर बीमारी पेरियोडोंटाइटिस अब सिर्फ दांतों तक सीमित समस्या नहीं मानी जा रही है। हालिया शोध में संकेत मिले हैं कि यह बीमारी शरीर के अन्य अंगों, खासकर सेंट्रल नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित कर सकती है। हालांकि मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) के साथ इसका संबंध अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

बैक्टीरिया और न्यूरोलॉजिकल असर

रिसर्च के मुताबिक, मुंह में पाया जाने वाला बैक्टीरिया Fusobacterium nucleatum एमएस से पीड़ित लोगों में विकलांगता के खतरे को बढ़ा सकता है। यह बीमारी चलने-फिरने और देखने की क्षमता को प्रभावित करती है।

वैज्ञानिकों का क्या कहना है

Hiroshima University Hospital से जुड़े एसोसिएट प्रोफेसर Masahiro Nakamori ने बताया कि अब तक एमएस पर शोध में गट माइक्रोबायोम पर ज्यादा ध्यान दिया गया, लेकिन ओरल माइक्रोबायोम की भूमिका को कम आंका गया है। उनके अनुसार, मुंह में मौजूद बैक्टीरिया शरीर में पुरानी सूजन (chronic inflammation) का बड़ा कारण बन सकते हैं।

शोध के प्रमुख निष्कर्ष

  • जिन एमएस मरीजों में इस बैक्टीरिया की मात्रा अधिक थी, उनमें लगभग 61.5% मामलों में बीमारी मध्यम से गंभीर स्तर तक पहुंची।
  • जब यह बैक्टीरिया अन्य पेरियोडोंटल बैक्टीरिया के साथ मौजूद होता है, तो स्थिति और खराब हो सकती है।
  • ऐसे मरीजों में विकलांगता स्कोर (EDSS) अधिक पाया गया, जो तेज न्यूरोडीजेनेरेशन का संकेत देता है।

अभी पूरी तरह साबित नहीं

कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में इस संबंध को पूरी तरह प्रमाणित नहीं किया गया है। यानी मसूड़ों की बीमारी और एमएस के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध अभी स्पष्ट नहीं है।

क्या है संकेत?

इसके बावजूद यह रिसर्च एक अहम बात की ओर इशारा करती है—मुंह की सेहत सिर्फ दांतों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे शरीर, खासकर दिमाग की सेहत से भी जुड़ी हो सकती है।

इसलिए नियमित ब्रशिंग, फ्लॉसिंग और डेंटल चेकअप जैसे छोटे कदम लंबे समय में बड़ी बीमारियों के जोखिम को कम कर सकते हैं।

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