पलामू। केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा योजना को समाप्त कर वीबी-जी राम जी बिल, 2025 को पारित किए जाने के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमाे) ने शनिवार को समाहरणालय के समक्ष एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया।
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व झामुमो पलामू के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने किया। संचालन केंद्रीय समिति सदस्य सह उपाध्यक्ष सन्नू सिद्दीकी एवं सचिव रंजन चंद्रवंशी ने संयुक्त रूप से किया। धरना के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त समीरा एस को मांग पत्र सौंपा।
धरना को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह मुद्दा केवल किसी कानून या बिल का नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण गरीबों, मज़दूरों, महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के संवैधानिक रोज़गार अधिकार से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2005 में लागू हुआ मनरेगा अधिनियम ग्रामीण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम था, जिसने पहली बार ग्रामीण क्षेत्रों में काम की कानूनी गारंटी दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा का नाम बदलना और उसे कमजोर करना महात्मा गांधी के आदर्शों को मिटाने का प्रयास है, जो कभी सफल नहीं हो सकता। मनरेगा के तहत कोई भी ग्रामीण नागरिक वर्ष के किसी भी समय काम मांग सकता है और 15 दिनों में काम नहीं मिलने पर बेरोज़गारी भत्ता देने का प्रावधान है।
इसके विपरीत, वीबी-जी राम जी बिल 2025 में रोज़गार को मांग-आधारित अधिकार से हटाकर केंद्र सरकार की अधिसूचना पर निर्भर कर दिया गया है, जिससे कई क्षेत्रों के लोगों से उनका रोज़गार अधिकार छिन जाएगा।
धरना के माध्यम से झामुमो ने केंद्र सरकार से मांग की कि वीबी-जी राम जी बिल, 2025 को मौजूदा स्वरूप में तुरंत वापस लिया जाए, मनरेगा की मांग-आधारित और कानूनी गारंटी को कमजोर न किया जाए तथा ग्रामीण गरीबों के हित में इसे और मजबूत किया जाए।
प्रदर्शन में केंद्रीय समिति सदस्य संजीव कुमार तिवारी, चंदन प्रकाश सिंहा, राजेश सिन्हा, गोपाल मुन्ना सिन्हा, सुनील तिवारी, सुशीला मिश्रा, रणजीत जायसवाल, देवानंद भारद्वाज, सलोनी टोपनो, दिनेश कुमार, इकबाल अहमद, मन्नत सिंह बग्गा, प्रदीप सिंह शामिल थे।





