जांच में बड़े खुलासे—संगठित गिरोह का पर्दाफाश, संजीव मुखिया मास्टरमाइंड; 21 गिरफ्तार, और बड़े नाम आने के संकेत
पटना: बिहार सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस बहुचर्चित केस में पूर्व डीजीपी एसके सिंघल से विस्तृत जवाब तलब किया है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जांच एजेंसी ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है, खासकर उन फैसलों को लेकर जो भर्ती प्रक्रिया के दौरान लिए गए थे। सूत्रों के मुताबिक, EOU की अब तक की जांच में कई स्तरों पर गंभीर खामियां सामने आई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी के चयन से लेकर प्रश्नपत्र तैयार करने, उसके सुरक्षित रखरखाव और परीक्षा संचालन तक कई जगह लापरवाही और गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि पेपर लीक कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।
जांच में एक संगठित गिरोह की भूमिका भी सामने आई है, जिसका सरगना संजीव मुखिया बताया जा रहा है। इस नेटवर्क का दायरा कई जिलों तक फैला हुआ है। अब तक इस मामले में 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और पूछताछ से कई अहम सुराग मिले हैं।
EOU अधिकारियों का मानना है कि जांच का दायरा अभी और बढ़ेगा और कुछ बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं। पूर्व डीजीपी से जवाब तलब किए जाने से यह संकेत मिल रहा है कि जांच एजेंसी मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए उच्च स्तर तक कार्रवाई कर रही है।
इस बीच, पेपर लीक कांड को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्ष ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।





