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पश्चिम बंगाल में SIR ट्रिब्यूनल पर नया संकट, पूर्व न्यायाधीशों ने जताई नाराज़गी; इस्तीफे के संकेत ।

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बैठक रद्द होने से ट्रिब्यूनल का काम शुरू होने में देरी ।

मानक प्रक्रिया (SOP) और व्यवस्था पर उठे सवाल ।

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कुछ पूर्व न्यायाधीश पद छोड़ने पर विचार कर रहे हैं ।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले SIR (स्पेशल इलेक्टोरल रिवीजन) ट्रिब्यूनल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। द्वारा सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिए जाने के बावजूद ट्रिब्यूनल का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
चुनाव से पहले रोजाना सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की जा रही है, लेकिन ट्रिब्यूनल की कार्यवाही में हो रही देरी ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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बैठक रद्द, बढ़ी नाराज़गी

बुधवार शाम 5 बजे मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में प्रस्तावित बैठक अचानक रद्द कर दी गई। इस फैसले से ट्रिब्यूनल में नियुक्त पूर्व न्यायाधीशों में नाराज़गी फैल गई।
सूत्रों के मुताबिक, न्यायाधीशों द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिसके चलते बैठक स्थगित करनी पड़ी। अब तक अगली बैठक की तारीख घोषित नहीं की गई है।
कुछ पूर्व न्यायाधीशों ने स्पष्ट रूप से असंतोष जताते हुए ट्रिब्यूनल से इस्तीफा देने की इच्छा भी जताई है।

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SOP और प्रक्रिया पर सवाल

पूर्व न्यायाधीशों ने ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर प्रश्न उठाए हैं:

मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) क्या है?

ट्रिब्यूनल का बुनियादी ढांचा कितना तैयार है?

यदि कोई BLO दस्तावेज़ स्वीकार नहीं करता, तो समाधान क्या होगा?

क्या हर मतदाता को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा?

न्यायाधीशों का कहना है कि इन बुनियादी सवालों के स्पष्ट जवाब के बिना ट्रिब्यूनल का संचालन संभव नहीं है।

दो तरीके से दाखिल होंगी याचिकाएं

SIR ट्रिब्यूनल में 19 न्यायाधीशों और पूर्व न्यायाधीशों की नियुक्ति की जा चुकी है। जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं।
याचिका दाखिल करने के दो विकल्प होंगे:

ऑनलाइन

ऑफलाइन

चुनाव से ठीक पहले SIR ट्रिब्यूनल को लेकर पैदा हुआ यह विवाद प्रशासनिक तैयारियों और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह मामला चुनावी प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।

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