पश्चिम बंगाल में संशोधित वोटर लिस्ट जारी, नदिया में लगभग 2.71 लाख और बांकुरा में 1.18 लाख नाम घटे

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद चुनाव आयोग द्वारा चरणबद्ध ढंग से प्रकाशित की जा रही संशोधित मतदाता सूचियों ने विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर बदलाव की तस्वीर सामने रखी है। आंकड़ों के अनुसार नदिया जिले में इस प्रक्रिया की शुरुआत से अब तक लगभग 2.71 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि बांकुड़ा जिले में कुल मिलाकर करीब 1.18 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है।

चुनाव आयोग सूत्रों के मुताबिक, उत्तर कोलकाता क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं और जो वर्तमान में सत्तारूढ़ दल के कब्जे में हैं, वहां पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लगभग 4.07 लाख नाम हटाए गए। इनमें से लगभग 3.90 लाख नाम प्रारूप सूची के स्तर पर हटाए गए थे, जबकि अंतिम सूची में अतिरिक्त 17 हजार नाम विलोपित किए गए। हालांकि इस क्षेत्र में नए नामों के समावेशन की अंतिम संख्या अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है।

बांकुड़ा जिले में पुनरीक्षण प्रक्रिया की शुरुआत के समय कुल मतदाता संख्या 30 लाख 33 हजार 830 थी। प्रारूप सूची जारी होने के बाद यह संख्या घटकर 29 लाख एक हजार नौ रह गई। सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के अगले चरण में करीब चार हजार और नाम हटाए गए, हालांकि प्रपत्र-6 के तहत कुछ हजार नए नाम जोड़े भी गए। अंतिम सूची में अब मतदाताओं की संख्या लगभग 29.15 लाख है, जो पूरी प्रक्रिया के दौरान करीब 1.18 लाख की शुद्ध कमी को दर्शाती है।

बांग्लादेश सीमा से सटे नदिया जिले में मतदाताओं की संख्या चार नवंबर को प्रक्रिया शुरू होने के समय 44.18 लाख थी, जो घटकर अंतिम सूची में लगभग 41.45 लाख रह गई। प्रारूप सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित होने के बाद यह संख्या 42 लाख दो हजार 261 तक आ गई थी। इस प्रकार जिले में कुल मिलाकर लगभग 2.73 लाख नाम हटाए गए।

उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में अंतिम सूची में 11 लाख 96 हजार 651 मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जबकि यहां कुल एक लाख दो हजार 835 नाम विलोपित किए गए हैं।

शनिवार को कई जिलों में अद्यतन मतदाता सूची की हार्ड कॉपी प्रदर्शित की गई, हालांकि दोपहर तक आयोग के निर्धारित पोर्टल और मोबाइल अनुप्रयोग पर सूची पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी थी। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि नाम हटाने के मुख्य कारण मृत्यु, स्थानांतरण, दोहराव और संबंधित व्यक्ति का पता न चल पाना रहे, जबकि नए नाम दस्तावेजों की जांच के बाद जोड़े गए।

आयोग के अनुसार, 16 दिसंबर को जारी प्रारूप सूची में शामिल 7.08 करोड़ मतदाताओं को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है स्वीकृत, विलोपित और विचाराधीन। इससे पहले अगस्त, 2025 तक की सूची में राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ थी, जो पहले चरण की जांच में 58 लाख से अधिक नाम हटने के बाद घटकर 7.08 करोड़ रह गई थी।

वर्ष 2002 के बाद यह पहली बार है जब राज्यव्यापी स्तर पर इतनी व्यापक पुनरीक्षण प्रक्रिया संचालित की गई। इस दौरान 1.67 करोड़ मतदाताओं के मामलों में सुनवाई की गई, जिनमें 1.36 करोड़ को तार्किक विसंगतियों के कारण चिन्हित किया गया था और 31 लाख नामों का उचित मानचित्रण नहीं पाया गया था। अभी भी लगभग 60 लाख मतदाता विचाराधीन श्रेणी में हैं और निर्णय के आधार पर पूरक सूचियां चरणबद्ध रूप से जारी की जाएंगी।

सूची के प्रकाशन के साथ ही विभिन्न जिलों में आम लोगों के बीच चिंता भी देखी गई। जिला निर्वाचन कार्यालयों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं, जहां मतदाता यह जांचने पहुंचे कि उनके नाम अद्यतन सूची में शामिल हैं या नहीं। कई स्थानों पर लोग सूचना पटों पर प्रदर्शित सूचियों की प्रतियां देखकर अपने नाम खोजते और मोबाइल फोन से तस्वीरें लेते दिखे। जिला दंडाधिकारी और उपमंडलीय कार्यालयों में भी लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं।

आगामी अप्रैल माह में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में यह व्यापक संशोधन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। सत्तारूढ़ दल और प्रमुख विपक्षी दल के बीच इस प्रक्रिया के उद्देश्य और प्रभाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जहां आयोग ने इसे शुद्ध और त्रुटिरहित मतदाता सूची सुनिश्चित करने की वैधानिक प्रक्रिया बताया है, वहीं राजनीतिक दल बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ा रहे हैं, क्योंकि प्रमुख जिलों में मतदाता संख्या में मामूली बदलाव भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।

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