Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

पश्चिम बंगाल में निपाह संक्रमण से निपटने के लिए राज्यव्यापी गाइडलाइन, दोनों संक्रमितों की हालत स्थिर

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share

कोलकाता। निपाह वायरस संक्रमण के मामलों को लेकर राज्य सरकार ने एहतियात के तौर पर नई और विस्तृत स्वास्थ्य गाइडलाइन जारी की है। हालांकि स्थिति अभी नियंत्रण में बताई जा रही है।

निपाह संक्रमण की रोकथाम और उपचार व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी ताजा गाइडलाइन में संपर्क में आए लोगों को जोखिम के आधार पर वर्गीकृत करने, क्वारंटीन, केमो-प्रोफिलैक्सिस, जांच और उपचार की स्पष्ट रूपरेखा तय की गई है।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

गाइडलाइन के अनुसार, संक्रमित या संदिग्ध मरीज के रक्त, लार, थूक, उल्टी, मूत्र या श्वसन स्राव जैसे किसी भी शारीरिक द्रव के संपर्क में आने वाले या 12 घंटे से अधिक समय तक बंद जगह में नजदीकी संपर्क में रहने वाले व्यक्तियों को ‘हाई रिस्क’ माना जाएगा। ऐसे बिना लक्षण वाले संपर्कों के लिए 21 दिन का होम क्वारंटीन अनिवार्य किया गया है और दैनिक स्वास्थ्य निगरानी भी की जाएगी।

यदि इस अवधि में बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, दौरे या मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत अस्पताल के निर्धारित आइसोलेशन यूनिट में भर्ती कर निपाह आरटी-पीसीआर जांच कराई जाएगी।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

वहीं, मरीज के कपड़े, बिस्तर, चादर या अन्य वस्तुओं (फोमाइट्स) के संपर्क में आने वालों को ‘लो रिस्क’ श्रेणी में रखा गया है। ऐसे लोगों को 21 दिन तक निगरानी में रखा जाएगा और लक्षण दिखने पर तुरंत आइसोलेशन व जांच की जाएगी।

गाइडलाइन में हाई रिस्क संपर्कों और बिना पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण के मरीजों की देखभाल में लगे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए केमो-प्रोफिलैक्सिस पर विचार करने की बात कही गई है। इसके तहत राइबाविरिन या फेविपिराविर जैसे एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

आरटी-पीसीआर पॉजिटिव और लक्षणयुक्त निपाह मरीजों के लिए तुरंत एंटीवायरल उपचार शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। उपचार प्रोटोकॉल में रेमडेसिविर के साथ राइबाविरिन या फेविपिराविर तथा आवश्यकता पड़ने पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के उपयोग का प्रावधान है। गंभीर मरीजों के इलाज में न्यूरोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की बहुविषयक टीम द्वारा सपोर्टिव केयर पर जोर दिया गया है।

उधर निपाह संक्रमित दो नर्सों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। दोनों बारासात के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में इलाजरत हैं।

पूर्व मेदिनीपुर के मयना निवासी ब्रदर-नर्स को गुरुवार को वेंटिलेशन से हटा लिया गया और वे अब होश में हैं। वहीं, पूर्व बर्दवान के कटवा की रहने वाली सिस्टर-नर्स अब भी कोमा में हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उन्होंने हाथ-पैर हिलाए और आंखें खोलने की कोशिश भी की है, जिसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, संक्रमित दोनों नर्सों के संपर्क में आए कुल 171 लोगों के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से अब तक 165 की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने शनिवार को स्पष्ट किया कि मरीज का हर पांच दिन में आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाएगा। किसी अन्य चिकित्सकीय जटिलता के अभाव में 24 घंटे के अंतराल पर लगातार दो बार रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाएगा।

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31