पटना, 04 अक्टूबर । बिहार में दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) विकसित करने की दिशा में तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्तावित परियोजना के तहत पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर को तेज रफ्तार रेल सेवा से जोड़ने की योजना है। इसके जरिए 80 से 120 किलोमीटर तक की दूरी को करीब एक घंटे में तय करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना की प्रारंभिक तैयारी के लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) को एलाइनमेंट एंड अल्टरनेटिव रूट (AAR) और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। NCRTC की टीम ने प्रस्तावित कॉरिडोर को लेकर तकनीकी अध्ययन शुरू कर दिया है।
यात्री संख्या और यात्रा पैटर्न का होगा अध्ययन
परियोजना के शुरुआती चरण में प्रस्तावित रूट के अलग-अलग हिस्सों का अध्ययन किया जा रहा है। इसमें यह देखा जाएगा कि किस क्षेत्र से कितने यात्रियों के मिलने की संभावना है और लोग रोजाना किस तरह आवागमन करते हैं।
यात्रियों की संख्या, आने-जाने के पैटर्न और संभावित यातायात दबाव के आधार पर रूट और स्टेशनों का चयन किया जाएगा। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि कॉरिडोर को किन इलाकों से होकर गुजारा जाए।
160 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है रफ्तार
प्रस्तावित RRTS को सेमी हाई स्पीड रेल सेवा के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके तहत ट्रेन की अधिकतम गति करीब 160 किलोमीटर प्रति घंटा और औसत परिचालन गति करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है।
इससे पटना और मुजफ्फरपुर के बीच मौजूदा यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। परियोजना के अमल में आने पर दोनों शहरों के बीच नियमित आवागमन करने वाले यात्रियों को तेज परिवहन विकल्प मिल सकेगा।
नौकरीपेशा और छात्रों को मिलेगा फायदा
RRTS सेवा शुरू होने पर नौकरीपेशा लोगों, छात्रों, कारोबारियों और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
पटना और मुजफ्फरपुर के बीच बड़ी संख्या में लोग शिक्षा, रोजगार, कारोबार और अन्य कार्यों के लिए आवागमन करते हैं। ऐसे में तेज क्षेत्रीय रेल सेवा से इन शहरों के बीच कनेक्टिविटी और आवागमन की सुविधा बेहतर हो सकती है।
पटना मेट्रो और रेलवे से जोड़ने की तैयारी
प्रस्तावित RRTS को दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत पटना मेट्रो, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनल और अन्य परिवहन माध्यमों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है।
इसका उद्देश्य यात्रियों को एक परिवहन माध्यम से दूसरे माध्यम तक आसानी से पहुंच उपलब्ध कराना है, ताकि पूरी यात्रा अधिक सुविधाजनक और निर्बाध हो सके।
AAR के बाद तैयार होगी DPR
परियोजना के लिए तैयार होने वाली AAR में अलग-अलग संभावित रूट का तकनीकी और यात्री उपयोगिता के आधार पर अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद उपयुक्त रूट का चयन कर DPR तैयार की जाएगी।
DPR में प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए भूमि की आवश्यकता, निर्माण कार्य, अनुमानित लागत, संभावित यात्री संख्या, स्टेशनों और अन्य तकनीकी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन शामिल होगा।
बिहार में चार RRTS कॉरिडोर की तैयारी
बिहार में चार RRTS कॉरिडोर के लिए AAR और DPR तैयार कराने को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें मुजफ्फरपुर-हाजीपुर-पटना कॉरिडोर भी शामिल है।
इस परियोजना के लिए 31.59 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है। प्रारंभिक अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
तेज कनेक्टिविटी से बदल सकता है क्षेत्रीय परिवहन
यदि प्रस्तावित योजना तय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ती है और भविष्य में इसका निर्माण पूरा होता है, तो पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच तेज और सुविधाजनक क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी विकसित हो सकती है।
RRTS के जरिए इन प्रमुख शहरों को जोड़ने की योजना से न केवल यात्रा का समय कम करने में मदद मिल सकती है, बल्कि रोजगार, शिक्षा और कारोबार के लिए शहरों के बीच आवागमन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।






