नवरात्रि के आगमन पर मां शीतला मंदिर में भक्ति का माहौल, कलश स्थापना के साथ गूंजे जयकारे

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पूर्वी सिंहभूम। हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर गुरुवार को शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। भालूबासा स्थित मां शीतला मंदिर में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर नवरात्रि पर्व का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरा रहा और चारों ओर “जय माता दी” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

सुबह से ही श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष स्वर्णरेखा नदी से पवित्र जल लेकर कलश यात्रा में शामिल हुए। सिर पर कलश धारण किए महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति गीत गाते हुए चल रही थीं, वहीं पुरुष श्रद्धालु भी पूरे जोश और श्रद्धा के साथ शोभायात्रा में सम्मिलित हुए। यात्रा के दौरान भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

शोभायात्रा में भगवान शिव, माता पार्वती, हनुमान जी एवं भूत-प्रेत का स्वरूप धारण किए कलाकार आकर्षण का केंद्र बने रहे। बैंड-बाजे की धुन पर कलाकारों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। रास्ते भर श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

भालूबासा स्थित मां शीतला मंदिर पहुंचने के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत कलश स्थापना की गई। पुजारियों ने पूरे धार्मिक अनुष्ठान के साथ माँ दुर्गा का आवाहन किया और अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई, जो पूरे नौ दिनों तक निरंतर जलती रहेगी। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने नवरात्रि व्रत का संकल्प लिया और माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना प्रारंभ की।

मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था, जहां फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से दिव्य वातावरण बना हुआ था। श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

नवरात्रि के पहले दिन से ही भक्तों में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला, जो आने वाले नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के माध्यम से जारी रहेगा।

यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का संदेश भी देता है।

कार्यक्रम के आयोजक मनोज सिंह ने बताया कि विगत चालीस वर्षों से कलश यात्रा और कलश स्थापना के साथ शीतला मंदिर में माता दुर्गा की पूजा किया जाता है।इस वर्ष भी एक हजार श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा में शामिल हुए हैं।

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