धर्म शिक्षा को डिजिटल मंच, शंकराचार्य की अनोखी पहल से घर बैठे परीक्षा

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वाराणसी। ज्योतिष्पीठ के जगद्‌गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने सनातन धर्म के संरक्षण के लिए एक अद्वितीय आत्म जागरण पहल ऑनलाइन धर्म परीक्षा (क्विज़) शुरू की है। हिन्दू समाज में व्याप्त आत्म-मोह एवं धर्म-विषयक अस्पष्टता को दूर करने के लिए धर्म परीक्षा में असली एवं नकली हिन्दू की स्पष्ट पहचान का संदेश है।

सोमवार को यह जानकारी केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ के प्रवक्ता संजय पांडेय ने दी। उन्होंने बताया कि धर्म परीक्षा अभियान की मुख्य विशेषता है कि यह स्व-मूल्यांकन का दर्पण है। यह क्विज़ समाज के लिए एक साक्षात् दर्पण के समान है, जहाँ कोई बाह्य परीक्षक नहीं होता, बल्कि व्यक्ति का अपना अंतर्मन ही न्यायाधीश की भूमिका निभाता है।

शंकराचार्य के मार्गदर्शन में यह प्रयास प्रत्येक सनातनी को आत्म-विश्लेषण का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। परीक्षा के प्रश्न सनातन मूल्यों, आचरण, नैतिकता, गौ-संरक्षण, राष्ट्र-भक्ति और शास्त्र-सम्मत विश्वास जैसे विषयों पर आधारित हैं। इस क्विज़ का उद्देश्य केवल ज्ञान की जाँच करना नहीं, बल्कि आचरण में सुधार और धर्म के प्रति दृढ़ संकल्प को प्रेरित करना है। शंकराचार्य महाराज का संदेश है कि यह दर्पण असली एवं नकली हिन्दू की स्पष्ट पहचान करने और समाज में सच्चे धर्माचरण के प्रसार के लिए रखा गया है।

अब तक हजारों श्रद्धालु इस परीक्षा में भाग ले चुके हैं और अनेक प्रतिभागियों ने पूर्ण अंक प्राप्त कर ‘सत्य-सनातनी’ होने का गौरव अर्जित किया है। सभी सनातन-प्रेमियों, युवा पीढ़ी और धर्म-सेवियों से अपील है कि वे इस पवित्र परीक्षा में भाग लेकर स्वयं को परखें और अपनी कमियों को दूर करें।

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