धनबाद, 29 सितंबर। जिले के टुंडी प्रखंड के मनियाडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत जातखूंटी पंचायत के गुलियाडीह गांव में जंगली हाथियों के झुंड ने एक सहायक अध्यापक को कुचलकर मार डाला। मृतक की पहचान गिरजा मुर्मू के रूप में हुई है। वह नया प्राथमिक विद्यालय, गुलियाडीह में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है, जबकि ग्रामीणों में वन विभाग और प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है।
देर रात हाथियों ने किया हमला
बताया जाता है कि गिरजा मुर्मू देर रात गांव में मौजूद थे। इसी दौरान जंगली हाथियों का झुंड वहां पहुंच गया। हाथियों ने उन्हें घेरकर कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। हादसे के बाद आसपास के इलाकों में भी भय और तनाव का माहौल बन गया।
एक महीने से क्षेत्र में घूम रहा हाथियों का झुंड
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले करीब एक महीने से जंगली हाथियों का झुंड टुंडी क्षेत्र में लगातार विचरण कर रहा है। हाथियों के गांवों और आबादी वाले इलाकों के आसपास पहुंचने से ग्रामीण पहले से ही भय के बीच रह रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने और लोगों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
अधिकारियों के देर से पहुंचने पर ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि घटना के कई घंटे बाद तक वन विभाग या प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।
ग्रामीणों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए मृतक सहायक अध्यापक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
हाथियों को आबादी से दूर करने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि हाथियों के झुंड को आबादी वाले इलाकों से तत्काल दूर किया जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के लगातार गांवों के आसपास आने से लोगों की जान-माल पर खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने कहा- समय रहते होती कार्रवाई तो बच सकती थी जान
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि हाथियों के लगातार विचरण की सूचना के बाद समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते, तो इस तरह की घटना को टाला जा सकता था।
सहायक अध्यापक की मौत के बाद पूरे गुलियाडीह और आसपास के इलाके में शोक, भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीण अब वन विभाग से हाथियों के आतंक से स्थायी राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं।






